ट्रांसपोर्ट नगर योजना के विरोध में मोहनसराय किसान संघर्ष समिति कोर कमेटी ने की बैठक
ट्रांसपोर्ट नगर योजना के विरोध में मोहनसराय किसान संघर्ष समिति कोर कमेटी ने की बैठक
उत्तर-प्रदेश

ट्रांसपोर्ट नगर योजना के विरोध में मोहनसराय किसान संघर्ष समिति कोर कमेटी ने की बैठक

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आरोप-वाराणसी विकास प्राधिकरण की लैण्ड यूज परिवर्तन की बात कानून का खुला उल्लंघन वाराणसी,16 अक्टूबर (हि.स.)। ट्रांसपोर्ट नगर योजना मोहनसराय के विरोध में किसान संघर्ष समिति लगातार मुखर है। शुक्रवार को किसान नर्सरी मोहनसराय में जुटे योजना से प्रभावित किसानों ने समिति के कोर कमेटी की बैठक में कहा कि हमारी जमीन वैधानिक रूप से वापस कर दिया जाय। बैठक में समिति के संरक्षक विनय शंकर राय 'मुन्ना' ने कहा कि वाराणसी विकास प्राधिकण की लैण्ड यूज परिवर्तन की बात कानून का खुला उलंघन है। योजना से प्रभावित किसानों ने दुखी होकर लोकसभा चुनाव 2019 चुनाव को बहिष्कार करने का निर्णय लिया था। तब भाजपा के प्रदेश सह प्रभारी सुनील ओझा की पहल पर किसानों ने चुनाव में भाग लिया था। उन्होंने कहा था कि किसानों को भूमि अधिग्रहण कानून के आधार पर जमीन वापस करने के लिए कानूनी कार्य के लिए सरकार पहल करेगी। मुन्ना ने आरोप लगाया कि अब विकास प्राधिकरण जिस तरह की साजिश लैंड यूज परिवर्तन करने की कर रहा है। उससे किसान अपने को छला हुआ महसूस कर रहे हैं। मुन्ना ने बताया कि योजना से प्रभावित 1,194 किसानों की जमीन पर वैधानिक अधिकार पाने के लिए खतौनी पर नाम भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के सेक्शन 24 की धारा 5(1) जिसमें स्पष्ट प्रावधान है कि अगर योजना 5 वर्ष में विकसित होकर चालू नहीं होती है तो योजना निरस्त मानी जाएगी। उन्होंने कहा कि लैंड यूज का भी परिवर्तन योजना निरस्त करने के बाद ही किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में किसानो की जमीन का खतौनी में नाम वैधानिक रूप से दर्ज कराने के लिए भाजपा सरकार से कानून के आधार पर तर्क संगत वार्ता करने का एक मत से हुआ निर्णय पूर्व में हुआ था। आरोप लगाया कि अब प्राधिकरण लैंड यूज़ परिवर्तन की बात कर रहा है। इसीलिए किसानों ने एक स्वर से निर्णय लिया है कि किसी भी सूरत में सर्वे या किसी प्रकार का कार्य जमीन पर नहीं होने देंगे। बैठक में किसान मेवा पटेल ने कहा कि जो किसान मुआवजा लिए हैं। वह मुआवजा किसान भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के आधार पर शपथ पत्र के साथ वापस कर देंगे। मेवा पटेल ने कहा कि प्रभावित किसानों की जीविका का एक मात्र साधन किसानी है। इसलिए किसान विरोधी योजना का हम 20 वर्ष से विरोध कर रहे है। अन्य किसानों ने बताया कि यहां महिलाएं फूल एवं सब्जी की व्यवसायिक खेती कर लाखों रुपया कमाकर परिवार चलती है। अपने स्व रोजगार से लोगों का पेट पालती है। जमीन पर किसानों का नाम 2003 मे काटकर वाराणसी विकास प्राधिकरण कर देने से किसान सरकारी योजनाओं से वंचित हो गये है। हिन्दुस्थान समाचार/श्रीधर/संजय-hindusthansamachar.in