ग्‍लोबल हैंडवाशिंग डे विशेष : भारत में ग्रामीण अंचल में महज 54 प्रतिशत आबादी शौचालय जाने के बाद धोती है हाथ
ग्‍लोबल हैंडवाशिंग डे विशेष : भारत में ग्रामीण अंचल में महज 54 प्रतिशत आबादी शौचालय जाने के बाद धोती है हाथ
उत्तर-प्रदेश

ग्‍लोबल हैंडवाशिंग डे विशेष : भारत में ग्रामीण अंचल में महज 54 प्रतिशत आबादी शौचालय जाने के बाद धोती है हाथ

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वाराणसी, 14 अक्टूबर (हि.स.)। कोरोना संकट काल में ही नहीं कई रोगों में भी हाथ धोने और स्वच्छता रखने मात्र से बेहतर स्वास्थ्य होता है। हमारे हाथों में न जाने कितनी अनदेखी गंदगी छिपी होती है, जो किसी भी वस्तु को छूने, उसका उपयोग करने और कई तरह के रोज़मर्रा के कामों के कारण होती है। यह गंदगी, बगैर हाथ धोए कुछ भी खाने-पीने से शरीर में पहुँच जाती है और कई तरह की बीमारियों को जन्म देती हैं। ऐसे में हाथों के स्वच्छता को लेकर जिला प्रशासन भी सजग है और जन जागरूकता पर खासा जोर दे रहा है। ग्लोबल हैण्डवाशिंग डे के एक दिन पूर्व बुधवार को जिला स्वास्थ्य समिति के अध्यक्ष और जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने बताया कि इस साल हम सभी ने हाथ की स्वच्छता के महत्व को बखूबी समझा है। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए सबसे प्रभावी तरीका ठीक तरह से हाथ धोना है जिससे संक्रमण का खतरा काफी हद तक काम हो जाता है। उन्होंने कहा कि डब्ल्यूएचओ के वैश्विक सुझावों में कोविड-19 महामारी को रोकने और नियंत्रित करने और इसे व्यवहार में लाने के लिए हाथ की स्वच्छता का लक्ष्य रखा गया। इसके लिए हाल ही में डब्ल्यूएचओ और यूनिसेफ की अगुवाई में ‘हैंड हाइजीन फॉर ऑल ग्लोबल इनिशिएटिव’ लांच किया गया। उन्होंने बताया कि हाथ धोने के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए वैश्विक स्तर पर हर साल 15 अक्टूबर को हैंड वॉशिंग दिवस मनाया जाता है। इस दिन की स्थापना वर्ष 2008 में ग्लोबल हैंड वाशिंग पार्टनरशिप द्वारा की गयी। जिसका प्रयास साबुन से हाथ धोने के महत्व पर जागरूकता बढ़ाना है । इस साल के ग्लोबल हैंडवाशिंग डे की थीम, "सभी के लिए स्वच्छ हाथ" निर्धारित की गयी है। साबुन से धोये हाथ, संक्रमण से बचाव का यही तरीका मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. वीबी सिंह ने बताया कि हाथ की स्वच्छता हमारे स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का ही एक हिस्सा है। सिर्फ साबुन से अच्छी तरह हाथ धुल लेने से ही कई तरह की बीमारियों से बचा जा सकता है, रोगाणु कई माध्यमों के जरिये से हमारे शरीर में फैलते हैं। उनमें से एक हमारे हाथ भी बीमारी का एक बड़ा जरिया है, जिसकी वजह से सबसे ज्यादा बच्चों में संक्रमण व गंभीर बीमारियों जैसे डायरिया, वायरल संक्रमण आदि का खतरा बना रहता है। हम लोग दिनभर में कई प्रकार की चीज़ों को छूते हैं। साथ ही भोजन भी हाथ से ही करते हैं। इन्हीं हाथों से हम अपने मुंह को भी छूते हैं। इसलिये एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भी यह संक्रमण फैलने का सबसे आसान तरीका बन जाता है। उन्होंने बताया कि संक्रमण से बचाव का सही तरीका 6 चरणों में ठीक तरह से हाथ धोना है। यही हमारे बेहतर स्वास्थ्य की ओर एक अच्छी पहल है। उन्होंने बताया कि सही तरह से हाथ धुलने से हम दस्त, टाइफाइड, पेट संबंधी रोग, आँख में होने वाले संक्रमण, त्वचा संबंधी रोग आदि से बच सकते है। क्या है तरीका हाथ धोने का मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि हाथ धुलने का सही तरीका दो मिनट तक साबुन से छह चरणों में हाथ धोना चाहिए। इसमें सबसे पहले सीधे हाथ पर साबुन लगाकर रगड़ना, उसके बाद उल्टे हाथ, इसके बाद नाखून, फिर अंगूठा, उसके बाद मुट्ठी तथा अंत में कलाई धोनी चाहिए। इस तरह से अगर हम अपने हाथों को धोयेंगे तो निश्चित रूप से 90 प्रतिशत तक बीमारियों से बच सकते हैं। यह संक्रमण से बचाव का बहुत छोटा मगर प्रभावी कदम है। कब-कब हाथ धोना चाहिए शौच के बाद, खाना बनाने व खाने से पहले, मुंह, नाक व आँखों को छूने के बाद, खाँसने व छींकने के बाद, घर की साफ-सफाई करने के बाद, किसी बीमार व्यक्ति से मिलकर आने के बाद व पालतू जानवरों से खेलने के बा । क्या कहते हैं आंकड़े, द स्टेट ऑफ हैंड वॉशिंग की रिपोर्ट द स्टेट ऑफ हैंड वॉशिंग की 2016 की वार्षिक रिपोर्ट बताती है कि भारत के ग्रामीण क्षेत्र में 54 प्रतिशत आबादी शौचालय के बाद हाथ धोती है, वही सिर्फ 13 प्रतिशत आबादी खाना बनाने से पहले और 27 प्रतिशत बच्चों को खाना खिलाने से पहले हाथ धोती है। दूसरी तरफ शहरी क्षेत्र में 94 प्रतिशत लोग शौचालय के बाद हाथ धोते है, 74 प्रतिशत खाना बनाने से पहले और 79 प्रतिशत बच्चों को खाना खिलाने से पहले हाथ धोते है। हिन्दुस्थान समाचार/श्रीधर/दीपक-hindusthansamachar.in