गोवर्धन : दसविसा के मुकुट मुखारविंद मंदिर में गबन के आरोपों को मंदिर रिसीवर ने बताया निराधार
गोवर्धन : दसविसा के मुकुट मुखारविंद मंदिर में गबन के आरोपों को मंदिर रिसीवर ने बताया निराधार
उत्तर-प्रदेश

गोवर्धन : दसविसा के मुकुट मुखारविंद मंदिर में गबन के आरोपों को मंदिर रिसीवर ने बताया निराधार

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- एफआईआर दर्ज कर लिए जाने के बाद भी अब घोटालों को भी सामने लाएंगे हम : याचिकाकर्ता हरीबाबू शर्मा मथुरा, 12 सितम्बर(हि.स.)। गोवर्धन दसविसा मुकुट मुखारविंद मंदिर मानसी गंगा में एसआईटी की जांच के बाद धनराशि के हड़पने के आरोप में बारह लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होने के बाद हलचल मच गई है। दर्ज रिपोर्ट में फूल बंगला का काम करने वाले लोग भी शामिल हैं। रिपोर्ट दर्ज किये जाने पर लगे आरोपों को मंदिर रिसीवर ने शनिवार को निराधार बताया है। दरअसल, मुकुट मुखारविंद मंदिर में जमीन खरीद व फूल बंगला आदि में वित्तीय गबन का आरोप दो साल पूर्व प्रभु दयाल व राधारमन द्वारा लगाया गया। शासन स्तर पर शिकायत होने के बाद इसकी एसआईटी से जांच कराई गई। एसआईटी ने अपनी जांच में मंदिर के रिसीवर व अन्य ग्यारह लोगों के खिलाफ दोषी मानते हुए रिपोर्ट दर्ज की गई है। शनिवार मंदिर के रिसीवर रमाकांत गोस्वामी ने बताया कि जांच के दौरान एसआईटी को उन्होंने अपना पक्ष रखा था। उनकी शिकायत हाईकोर्ट की गई थी जहां उन्हें निर्दोष साबित किया गया था। जो भी मंदिर के नाम खरीदी है उसकी कीमत दो गुनी हो चुकी है और इससे मंदिर को लाभ हुआ है। फूल बंगला का भुगतान एक या दो माह का नहीं बल्कि पूरे साल का हुआ है। समय से फूल बंगला बने हैं और भक्तों ने दर्शन किये हैं। इसके सेवायत ठेकेदार व वादी-प्रतिवादी साक्षी हैं। यह सब सेवायतों की आपसी वैमनस्यता के कारण आरोप लगाये गये हैं। जल्द ही सारी स्थिति साफ हो जाएंगी। क्या हैं मामला गोवर्धन के ही दसबिसा निवासी हरीबाबू शर्मा पुत्र मोहन लाल शर्मा ने गत दिनों इलाहाबाइ हाईकोर्ट में एक याचिका डालने की पूरी तैयारी कर उसमें प्रिंसिपल सेक्रेट्री (होम) उत्तर प्रदेश तथा डीआईजी (एसआईटी) लखनऊ को भी पार्टी बनाने के मकसद से अपने वकील सत्येन्द्र नारायाण सिंह के जरिए याचिका की कॉपी भेज दी। दरअसल, हरीबाबू ऐसा करने के लिए तब मजबूर हुए जब उन्हें आरटीआई के माध्यम से यह जानकारी मिली कि जांच एजेंसी अपना काम पूरा करके रिपोर्ट शासन को दे चुकी है। ये पता लगने के बाद हरीबाबू को यकीन हो गया कि घोटालेबाजों द्वारा किया गया दावा सही था। कि वह एसआईटी की जांच को ठंडे बस्ते में डलवा चुके हैं। अब जबकि हरीबाबू द्वारा प्रिंसिपल सेक्रेट्री (होम) उत्तर प्रदेश तथा डीआईजी (एसआईटी) को पार्टी बनाने की सूचना मिली तो हड़कंप मचना स्वाभाविक था। लिहाजा तुरंत शासन स्तर से एक ओर जहां एसआईटी की जांच रिपोर्ट को सामने रख दिया गया। वहीं दूसरी ओर 11 आरोपियों के खिलाफ एफआईआर कराने के आदेश भी कर दिए गए। इस संबंध में पूछे जाने पर हरीबाबू शर्मा ने बताया कि एसआईटी की जांच रिपोर्ट के आधार पर एफआईआर दर्ज कर लिए जाने के बाद भी वह न्यायालय के माध्यम से मुकुट मुखारबिंद और दानघाटी मंदिर में हुए उन घोटालों को सामने लाने की लड़ाई लड़ते रहेंगे जो अभी दबे हुए हैं और जिन्हें इस गिरोह ने अंजाम दिया है। हिन्दुस्थान समाचार/महेश/मोहित-hindusthansamachar.in