गोवंश के मूत्र से बनेगी दवा, खाद की बजाय गड्ढे में गोबर का निस्तारण
गोवंश के मूत्र से बनेगी दवा, खाद की बजाय गड्ढे में गोबर का निस्तारण
उत्तर-प्रदेश

गोवंश के मूत्र से बनेगी दवा, खाद की बजाय गड्ढे में गोबर का निस्तारण

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-गोबर से वर्मी कंपोस्ट खाद बनाने की तैयारी - धन अर्जन होने से गोवंश आश्रय स्थल की बढ़ेगी आय मीरजापुर, 17 जुलाई (हि.स.)। गोवंश आश्रय स्थल पर प्रतिदिन निकलने वाले गोवंश के मूत्र से दवा व मल का खाद के रुप में प्रयोग करने की बजाए गड्ढे में निस्तारित किया जा रहा है। हांलाकि गोबर को वर्मी कंपोस्ट खाद तथा मूत्र का दवा के रुप में प्रयोग हो, इसके लिए जिला प्रशासन द्वारा उचित माध्यम की तलाश की जा रही है। गोबर की खाद को दो रुपये प्रति किलो की दर से बेचने का प्रस्ताव पहले ही ग्राम पंचायत द्वारा प्रशासन को दिया जा चुका है। प्रस्ताव के मूर्तरूप लेने से धन अर्जन होने से गोवंश आश्रय स्थल की आय बढ़ेगी। इस समय 363 गोवंश सरंक्षित है। संचालन से बामी सहित आस-पास के आधा दर्जन गांवों के किसानों की प्रति डार लाखों रुपये की फसल बच रही है। इसके पहले बेसहारा पशुओं द्वारा फसल चौपट हो जाता था। गौशाला खुलने से किसानों की फसल सुरक्षित होने से आय बढ़ी है। इससे किसानों के चेहरे पर मुस्कान लौट आई है। विकास खंड लालगंज के बामी में गोवंश आश्रय स्थल पर पर संरक्षित गोवंश के मल-मूत्र निस्तारण स्थल के पास में स्थित गड्ढे में किया जा रहा है। यहां पर मनरेगा योजना से वर्मी कपोस्ट खाद बनाने के लिए योजना स्वीकृत है, जिसका निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। गोवंश आश्रय स्थल नेशनल हाइवे से एक किलोमीटर दूर है। आस-पास कोई नदी नहीं है। चार सौ मीटर की दूरी पर बरसाती नाला स्थित है, लेकिन आस-पास कोई बस्ती नही है। गोवंश आश्रय स्थल सिवान में तथा बस्ती से दूर है। प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालय लगभग एक किलोमीटर से दूरी पर है। जिस स्थान पर गौशाला स्थापित है वहां पर बाढ़ की कभी गुंजाइश नही रही है। बरसात के समय में भी बरसाती नाले का पानी गौशाला तक कभी नही पहुंचा है। ग्राम पंचायत द्वारा पौधरोपण किया गया है। प्रकाश की व्यवस्था के लिए सोलर लाइट व हाईलोजन, छाया के लिए टीन शेड व चरनी का निर्माण किया गया है। जिलाधिकारी के निर्देश पर चारों तरफ सुरक्षा के दृष्टिकोण से जाल लगाने का कार्य प्रस्तावित है। बामी गो आश्रय स्थल की संचालक व ग्राम प्रधान सावित्री देवी ने बताया कि पशु चिकित्सकों की टीम द्वारा प्रतिदिन नियमित गोवंशों के स्वास्थ्य का परीक्षण किया जाता है। इनको शुद्ध पेयजल के लिए सबमर्सिबल के माध्यम से पाइप द्वारा पानी आपूर्ति की जाती है। संरक्षित गोवंश को भूसा खिलाने के साथ नियमित रुप से हरा चारा खिलाया जाता है। इनको उचित देख भाल के लिए प्रति 25 गोवंश पर एक गो सेवक रखे गए है। गौशाला में साफ सफाई के लिए दस महिलाए नियमित रुप से कार्यरत है। प्रति गोवंश पर 30 रुपये मिलता है, लेकिन महंगाई के दौर में नाकाफी है, इसे बढ़ाकर 50 रुपये करने की मांग की गई है। गोमूत्र व गोबर का निस्तारण गोवंश आश्रय स्थल में संरक्षित गोवंश के गोबर व मूत्र का निस्तारण परिसर में बने गड्ढे में किया जाता है। सभी संरक्षित गोवंशों के एक दिन का गोबर दो ट्रैक्टर ट्राली होता है, जिसे वहीं पर रखा जाता है। गौशाला में कार्यरत 10 महिला श्रमिकों द्वारा प्रतिदिन गोबर को वहां से हटाया जाता है, जिसे एक गड्ढे में रखा जा रहा है। हांलाकि गोमूत्र को अभी रखने की कोई खास व्यवस्था नही किया गया है। गोवंश के मल, मूत्र का इस्तेमाल अस्थाई गोवंश आश्रय स्थल का अर्थशास्त्र है कि यहां से निकलने वाले गोवंश का मल, मूत्र का इस्तेमाल दवा व खाद के रुप मे किया जाएगा। गोबर को वर्मी कंपोस्ट तथा मूत्र का दवा के रुप में प्रयोग हो इसके लिए उचित माध्यम की तलाश किया जा रहा है। इससे जहां धन अर्जन होगा वही गौशाला की आय भी बढ़ेगी। हिन्दुस्थान समाचार/गिरजा शंकर-hindusthansamachar.in