गोद लिए गये गांवों को विकसित करने के लिए एक साल का रोडमैप तैयार करेगा बीबीएयू
गोद लिए गये गांवों को विकसित करने के लिए एक साल का रोडमैप तैयार करेगा बीबीएयू
उत्तर-प्रदेश

गोद लिए गये गांवों को विकसित करने के लिए एक साल का रोडमैप तैयार करेगा बीबीएयू

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लखनऊ, 08 अक्टूबर (हि.स.)। बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य संजय सिंह ने विवि के उन्नत भारत अभियान की टीम के साथ एक विशेष बैठक की। इसमें उन्होंने विवि द्वारा गोद लिए गए पांच गांवों को विकासशील बनाने के बारे में चर्चा की। इस बैठक में उन्नत भारत अभियान के नोडल ऑफिसर प्रोफेसर नवीन कुमार अरोरा, संयोजक प्रोफेसर शिल्पी वर्मा, सदस्य डॉ0 रचना गंगवार, डॉ0 यूवी किरण, डॉक्टर राजश्री और डॉक्टर मनोज कुमार डडवाल ने हिस्सा लिया। बैठक में कुलपति ने उन्नत भारत अभियान की टीम से गोद लिए गए पाँच गाँवों में विकासकार्यों के लिए एक साल का रोडमैप तैयार करने को कहा। उन्होंने कहा कि एनसीसी, एनएसएस के साथ ही विश्वविद्यालय के अन्य सभी विभागों को इस अभियान के साथ जोड़ा जाए और यह भी तय किया जाए कि वो विभाग गाँव की प्रगति में किस तरह से अपना योगदान दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि गाँव में मौजूद समस्याओं को जानकर उनमें से कुछ को चिन्हित किया जाए, और उनका योजनाबद्ध तरीके से निराकरण किया जाए। साथ ही, हमारा यह प्रयास कितना सफल हुआ उसका आकलन भी साल के अंत में किया जाए, ताकि यह पता लग सके कि हम गाँव में कितने सकारात्मक बदलाव लाने में सफल हुए। उन्नत भारत अभियान के नोडल ऑफिसर प्रो. नवीन कुमार अरोरा ने बताया कि गोद लिए गए सभी 5 गाँवों के निवासियों से पहले ही उनकी समस्याओं को जानने के लिए एक फॉर्म भरवाया जा चुका है, जिसके माध्यम से उनकी समस्याओं के बारे में आंकड़े उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि गाँव में पानी की समस्या बहुत ज्यादा है तथा प्राकृतिक जल स्रोत दूषित पाये गए हैं जिस पर ध्यान देने की जरूरत है। साथ ही प्रो0 अरोरा ने ऑर्गेनिक फार्मिंग और जल स्रोतों के जीर्णोद्धार पर बल दिया। उन्नत भारत अभियान की संयोजक प्रोफेसर शिल्पी वर्मा ने बताया कि गाँव में महिलाओं में कुपोषण और एनीमिया की समस्या है, जबकि गाँव में वो सारे खाद्य पदार्थ प्राकृतिक रूप में उपलब्ध है जिसके सेवन से इन समस्याओं से बचा जा सकता है। प्रोफेसर शिल्पी वर्मा ने स्किल डेवलपमेंट की बात करते हुए, विश्वविद्यालय द्वारा गाँव वालों को मछली पालन और मधुमक्खी पालन की ट्रेनिंग दिये जाने का सुझाव भी दिया। चर्चा के दौरान यह बात भी रखी गई कि गाँव से कुछ बच्चों को चयनित कर उन्हें डिजिटल लिटरेसी प्रदान करने की दिशा में कार्य किया जाये। हिन्दुस्थान समाचार/उपेन्द्र/दीपक-hindusthansamachar.in