कोरोना संकट ने कालीन उद्योग को लगाई ढाई हजार करोड़ की चपत
कोरोना संकट ने कालीन उद्योग को लगाई ढाई हजार करोड़ की चपत
उत्तर-प्रदेश

कोरोना संकट ने कालीन उद्योग को लगाई ढाई हजार करोड़ की चपत

news

मीरजापुर, 22 सितम्बर (हि.स.)। पूर्वांचल के विभिन्न जिलों के बुनकरों को रोजगार मुहैया कराने वाले जिले का कालीन उद्योग कोरोना संक्रमण से बुरी तरह प्रभावित हो गया है। बीते छह माह से कालीन व्यवसाइयों को नये आर्डर जहां मिल ही नहीं पाए। वहीं शो-रूम में पूर्व में निर्यात के लिए तैयार कालीन डंप पड़ी है। जिले के किसी भी कालीन व्यवसायी के पास कोई भी नया आर्डर नहीं है। जिले के कई कालीन व्यवसाइयों के समक्ष जहां आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है वहीं बुनकरों को दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करना मुश्किल हो गया है। बीते छह माह से विदेशी भी नहीं आ रहे हैं। इससे कालीन व्यवसाइयों को नया आर्डर भी नहीं मिल पा रहा है। इस उद्योग से जुड़े लगभग एक लाख बुनकर बेरोजगार हो गए है। जिले के कालीन व्यवसाइयों की अमेरिका, जर्मनी व आस्ट्रेलिया में स्थित शोरूम में रखे पुराने कालीन किसी तरह बेंच कर खुद का खर्च निकाल रहे है। कालीन व्यवसाइयों का कहना है कि यदि कोरोना संक्रमण न रूका तो यह व्यवसाय पूरी तरह चौपट हो सकता है। सीईपीसी के चेयरमैन व कालीन व्यवसायी सिद्धनाथ सिंह का कहना है कि बीते छह माह में लगभग दो से ढाई हजार करोड़ रूपये का टर्नओवर प्रभावित हुआ है। कालीन उद्यमियों की तरफ से लगाए जाने वाले दो मेले भी स्थगित कर दिए गए। कालीन उद्योग को बचाए रखने के लिए वर्चुअल मेले का आयोजन कर किसी तरह 30 से 40 फीसदी व्यवसाय को बचाए रखा गया, पर अभी भी स्थिति में सुधार न होने से भविष्य में इससे भी अधिक क्षति होने की संभावना बढ़ गयी है। टूरिस्ट जब आते थे तो कालीन खरीदते थे, अब वह भी बंद है। कहा कि बीते मार्च महीने से ही निर्यात पूरी तरह ठप हो गया है। विदेशों से आर्डर भी नहीं मिल पा रहा है। कालीन व्यवसायी मोहम्मद परवेज खान ने बताया कि कालीन उद्योग पूरी तरह से विदेशी बायरों पर निर्भर है। उत्पादन का 80 फीसदी माल विदेशों में निर्यात किया जाता है। जब तक निर्यात प्रक्रिया नहीं शुरू होगी। तब तक इस उद्योग से जुटे लोगों को लाभ नहीं मिल पाएगा। कालीन व्यवसायी मोहम्मद असफाक ने कहा कि निर्यात बंद हो जाने से उत्पादन भी बंद करना पड़ा है। कालीन तैयार कराने के लिए बाजार से खरीदे गए ऊन, सूत और अन्य सामान भी खराब हो रहे हैं। वहीं कालीन व्यवसायी सुजीत यादव का कहना है कि कोरोना संकट से यह उद्योग बर्बाद हो गया। बीते मार्च से ही नया आर्डर नहीं मिल पा रहा है। वहीं पुराने आर्डर पर तैयार किया गया माल भी गोदाम में पड़ा है। निर्यात बंद होने से पहले से तैयार करायी गयी कालीन के खराब होने की भी संभावना बढ़ गयी है। हिन्दुस्थान समाचार/गिरजा शंकर/विद्या कान्त-hindusthansamachar.in