कॉफी हाउस के मेन्यू में शामिल हुआ इम्युनिटी बूस्टर काढ़ा, लोगों का आ रहा पसन्द
कॉफी हाउस के मेन्यू में शामिल हुआ इम्युनिटी बूस्टर काढ़ा, लोगों का आ रहा पसन्द
उत्तर-प्रदेश

कॉफी हाउस के मेन्यू में शामिल हुआ इम्युनिटी बूस्टर काढ़ा, लोगों का आ रहा पसन्द

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लखनऊ, 22 सितम्बर (हि.स.)। लखनऊ की सांस्कृतिक और राजनीतिक विरासत का गवाह और हिस्सा रहा इंडियन कॉफी हाउस कोरोना संक्रमण काल में नई भूमिका में सामने आया है। आम दिनों में यहां लोग काफी का स्वाद लेने पहुंचते हैं। लेकिन, अब यहां इम्युनिटी बूस्टर काढ़ा भी उपलब्ध है। इस तरह यहां के मेन्यू परिवार में एक और सदस्य की बढ़ोतरी हो गयी है। कॉफी हाउस की संचालक संस्था कॉफी वर्कर्स को-आपरेटिव सोसायटी लिमिटेड की सचिव अरुणा सिंह कहती हैं कि चिकित्सकों से लेकर प्रदेश सरकार की ओर से लगातार लोगों से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का काढ़े का सेवन करने की भी अपील की जा रही है। इम्युनिटी की तलवार काढ़े से ही धारदार बनेगी। लेकिन, काढ़ा बनाना सबके बस की बात नहीं है। विभिन्न औषधियों की उचित मात्रा में नाप-जोख, फिर उनका पाउडर बनाना, फिर धीमी आंच पर घंटों पकाना सबके बस की बात नहीं। इसके मद्देनजर कई कम्पनियों ने काढ़े के विभिन्न अवयवों को उचित अनुपात में मिलाकर उनके पैकेट बेचने शुरू कर दिये हैं, लेकिन उसे घंटों पकाना भी हर किसी के लिए सम्भव नहीं है। गिलोय और तुलसी समेत अन्य औषधियां होती हैं इस्तेमाल ऐसे में वह कॉफी हाउस आ सकते हैं। यहां यह काढ़ा सेवन करने वाले व्यक्ति की इम्युनिटी बढ़ाने में अवश्य ही कारगर साबित होगा, क्योंकि इस काढ़े में गिलोय और तुलसी समेत आयुष मंत्रालय द्वारा अनुमन्य औषधियां ही इस्तेमाल की जाती हैं। चीनी की बजाय गुड़ का उपयोग करते हैं। वह कहती हैं कि कई बार ग्राहक को थोड़ी अधिक प्रतीक्षा करनी पड़ जाती है, क्योंकि यहां धीमी आंच पर काढ़ा बनाया जाता है, ताकि सभी औषधियां ठीक से पक जायें और उनके गुण काढ़े में आ जायें। कोरोना ने सिखा दिया है प्रतीक्षा करना यह पूछने पर कि काढ़ा बनाने में ज्यादा समय लगने पर लोग ऊब जाते होंगे, अरुणा सिंह ने कहा- कोरोना ने प्रतीक्षा करना सिखा दिया है। काढ़ा पीने लोग हजरतगंज में कॉफी हाउस आ रहे हैं तो जाहिर है कि वे कोरोना काल में जिन्दगी की रक्षा के लिए, इम्युनिटी बढ़ाने के लिए काढ़े के महत्व को समझ रहे हैं। ऐसे में वे बिना कुछ कहे प्रतीक्षा करते हैं। जिन्दगी कड़वी न हो जाये, इसलिए कड़वा काढ़ा ही ठीक काढ़े के कड़वे स्वाद को लेकर कभी किसी ग्राहक ने कुछ कहा, इस सवाल का जवाब वहां बैठे एक युवा जोड़े में से लड़की ने दिया। उसने कहा- ‘घर में किसी को भी कोरोना हो गया तो पूरे परिवार की जिन्दगी में कड़वाहट घुल जायेगी। अच्छा है कि हम काढ़े का कड़वापन बर्दाश्त कर लें और इसकी शिकायत करने के लिए बचे रहें।’ लड़का बोला- ‘जब जान पर बनी हो तो स्वाद की चिन्ता किसे होगी? अब तो आदत-सी हो गयी है।’ ऐसे तैयार होता है कॉफी हाउस का इम्युनिटी बूस्टर काढ़ा काढ़े में औषधियां या मसाले को लेकर इसे बनाने का जिम्मा संभाल रहे अनिल बताते हैं कि उनके इम्युनिटी बूस्टर काढ़े में ‘अदरक, कच्ची हल्दी, लौंग, तुलसी, मुलेठी, दालचीनी, काली मिर्च, गिलोय, लेमन ग्रास’ उपयोग किया जाता है। थोड़ा गुड़ भी डालते हैं। सारी औषधियों के पाउडर का मिश्रण पानी के साथ धीमी आंच पर उबालते हैं। इस तरह कॉफी हाउस का इम्युनिटी बूस्टर काढ़ा तैयार होता है। कोरोना के खिलाफ लड़ाई में काढ़े से योगदान काढ़े को सामान्य पेय के रूप में प्रस्तुत करने की प्रेरणा अरुणा सिंह को समाज से ही मिली। उन्होंने कहा कि चिकित्सक, नर्सें और अन्य अस्पताल कर्मी, पुलिस, मीडियाकर्मी कोरोना के खिलाफ लड़ाई में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। हम समाज के इन अंगों का हिस्सा नहीं हैं, लेकिन कुछ करने की इच्छा थी, तो हमने लोगों के लिए काढ़ा सुलभ बनाने की जिम्मेदारी उठायी, ताकि औषधियां लाने, कूटने-छानने, पकाने से झंझट से बचने के चक्कर में यदि कोई काढ़े के सेवन से वंचित रहता है तो यह ठीक नहीं है। इसलिए हमने इम्युनिटी बूस्टर काढ़ा को अपने मेन्यू में शामिल किया। हिन्दुस्थान समाचार/संजय/ रामानुज-hindusthansamachar.in