केवल भूमिका की समानता (पैरिटी) जमानत का आधार नहीं
केवल भूमिका की समानता (पैरिटी) जमानत का आधार नहीं
उत्तर-प्रदेश

केवल भूमिका की समानता (पैरिटी) जमानत का आधार नहीं

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प्रयागराज, 24 जुलाई (हि.स.)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी अपराध में अभियुक्तों की भूमिका में समानता (पैरिटी) होना जमानत देने का एकमात्र आधार नहीं हो सकता है। हर अभियुक्त के मामले में तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करने के उपरांत ही जमानत देने या न देने पर निर्णय लिया जा सकता है। हाईकोर्ट ने हाथरस में दोहरे हत्याकांड के आरोपी गजेंद्र सिंह की जमानत इसी आधार पर खारिज कर दी है। जबकि इसी मामले में सह अभियुक्त की जमानत पहले मंजूर हो चुकी है। जमानत प्रार्थनापत्र पर न्यायमूर्ति रवींद्र नाथ तिलहरी ने सुनवाई की। जमानत प्रार्थनापत्र का विरोध कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी का कहना था कि पैरिटी जमानत देने का एकमात्र आधार नहीं हो सकता है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के कई न्यायिक निर्णयों का हवाला दिया। जिसमें पैरिटी को जमानत का आधार नहीं मानते हुए प्रार्थनापत्र निरस्त किए गए हैं। मामले के अनुसार नौ जून 2018 को हाथरस के जंक्शन थाना क्षेत्र में ग्राम प्रधान चुनाव की रंजिश में भुक्तभोगी राजकुमार के घर पर 11 अभियुक्तों ने धावा बोल दिया। अंधाधुंध फायरिंग की जिसमें राजकुमार के भाई नेत्रपाल और प्रताप की मौके पर ही मौत हो गई। राजकुमार को भी गोलियां लगी मगर वह बच गया। बचाव पक्ष का कहना था कि अभियुक्त हरेंद्र पर लगे आरोप सामान्य किस्म के हैं। पुलिस ने उसके पास से 315 बोर का तमंचा बरामद किया है। जबकि मृतकों को 312 बोर के असलहे से चोटें पहुंची है। एक अन्य अभियुक्त हरेंद्र के पास से भी 315 बोर का तमंचा बरामद किया गया है। हरेंद्र की जमानत मंजूर हो गई है, इसलिए गजेंद्र को भी इसी आधार पर जमानत दी जाए। कोर्ट ने इसे अस्वीकार करते हुए कहा कि हरेंद्र का कोई आपराधिक इतिहास नहीं था जबकि गजेंद्र पर पहले से कई मुकदमे हैं। इसलिए समानता का लाभ नहीं मिल सकता। हिन्दुस्थान समाचार/आर.एन/राजेश-hindusthansamachar.in