कालमेघ : कोरोना संक्रमण से बचाव के साथ ही आय को बढ़ाने का अच्छा जरिया, एक हेक्टेयर में 80 हजार तक मुनाफा
कालमेघ : कोरोना संक्रमण से बचाव के साथ ही आय को बढ़ाने का अच्छा जरिया, एक हेक्टेयर में 80 हजार तक मुनाफा
उत्तर-प्रदेश

कालमेघ : कोरोना संक्रमण से बचाव के साथ ही आय को बढ़ाने का अच्छा जरिया, एक हेक्टेयर में 80 हजार तक मुनाफा

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-यकृत को बनाता है मजबूत, चर्म रोग में भी सहायक होने के साथ ही बुखार के लिए रामबाण है चिरायता - रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सर्वोत्तम, कोरोना काल में बढ़ गयी है मांग लखनऊ, 02 अगस्त (हि.स.)। अश्वगंधा, चिरायता अथवा भूनिम्ब, किराततिक्त, कल्पनाथ अथवा कालमेघ् एक ऐसा पौधा है जो आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सर्वोत्तम है। इसके साथ ही इसकी खेती भी आय को बढ़ाने में काफी सहायक है। इसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि एक हेक्टयेर भूमि में यह 80 हजार रुपये तक मुनाफा दे सकता है। आयुर्वेदाचार्य डाक्टर एसके राय ने बताया कि यह लिवर के काम करने की क्षमता में वृद्धि करता है। बुखार, त्वचा रोग, फोड़े आदि के लिए रामबाण होने के साथ ही इसमें एंटीबायटिक, एंटीट्यूमर, एंटीएलर्जिक गुण भी पाये जाते हैं। इस कारण कोरोना काल में इसकी महत्ता बढ़ गयी है। इसके सेवन से कोरोना संक्रमण से बचा जा सकता है। एक रिपोर्ट के अनुसार पूरी दुनिया में कालमेघ की खपत लगभग 1300 टन है लेकिन कोरोना काल में इसकी खपत डेढ़ गुना बढ़ गयी है। कालमेघ का इस्तेमाल 25 से ज्यादा हर्बल फार्म्यूलेशन में किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त इसके कैप्सूल, पाउडर व अर्क बाजार में बिक रहे है। जहां जलभराव न हो, वहां इसका पौधा आसानी से लगाया जा सकता है। कालमेघ के लिए बाजार की कमी नहीं है। इस संबंध में उपनिदेशक उद्यान अनीस श्रीवास्तव ने हिन्दुस्थान समाचार से कहा कि इसके खरीदार हर जगह लोकल बाजार में भी उपलब्ध हैं। कैप्सूल या पाउडर बनाने के लिए लोकल वैद्य भी इसे लेते हैं। इसके अलावा इसका ई-मार्केट भी है। कई कंपनियों में भी उत्पाद बेचने के लिए रजिस्टर्ड करवा सकते हैं। जो लोग सेहत के लिहाज से लगाना चाहते हैं, वे नर्सरी से लेकर मिर्ची के पौधे की तरह गमले में भी लगा सकते हैं। बस यह ध्यान देना जरूरी है कि इसकी जड़ों में पानी नहीं ठहरना चाहिए। पानी उतना ही देना चाहिए, जिससे उसमें नमी बनी रहे। इससे पौधा मरेगा नहीं। कालमेघ की खेती के लिए एक हेक्टेअर भूमि में पांच सौ ग्राम बीज की जरूरत होती है। बाजार में तीन हजार रुपये प्रति किलो के हिसाब से बीज मिल रहे हैं। नर्सरी में इसके पौधे लगभग 30 दिन में तैयार हो जाते हैं। इसके बाद खेतों में 10 गुणे 2 मीटर की दूरी पर लगाना होता है। पांच माह में फसल तैयार हो जाती है। कालमेघ को सहफसली के रूप में भी लगाया जा सकता है। उपनिदेशक उद्यान अनीस श्रीवास्तव ने बताया कि वर्षा ऋतु की कम पानी वाली फसलों के साथ इसे आसानी से लगाया जा सकता है। इससे 30 फीसदी तक मुनाफा बढ़ जाता है। खेती के अलावा बाग में भी इसकी खेती हो सकती है। हिन्दुस्थान समाचार /उपेन्द्र-hindusthansamachar.in