कार्तिक पूर्णिमा पर पंचनद धाम पर कोविड प्रोटोकॉल के तहत श्रद्वालु आस्था की डुबकी
कार्तिक पूर्णिमा पर पंचनद धाम पर कोविड प्रोटोकॉल के तहत श्रद्वालु आस्था की डुबकी
उत्तर-प्रदेश

कार्तिक पूर्णिमा पर पंचनद धाम पर कोविड प्रोटोकॉल के तहत श्रद्वालु आस्था की डुबकी

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- प्रबंधन समिति की बैठक संपन्न, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए ही होंगे स्नान औरैया, 21 नवम्बर (हि.स.)। जनपद औरैया, इटावा और जालौन की सीमा पर पांच नदियों यमुना, चंबल, सिंधु, पहुज और क्वांरी नदियों के संगम पर हर साल कार्तिक पूर्णिमा पर मेला लगता है। प्रसिद्ध तीर्थस्थल पंचनद के संगम पर इस वर्ष कोरोना महामारी के कारण बेरौनक रहने की संभावना है और मेला में लगने वाला रैला देखने को नहीं मिलेगा। अगर सब कुछ ठीक रहा तो मेला न लगाते हुए र्सिफ स्नान की इजाजत दी जा सकती है वह भी कोविड प्रोटोकॉल के नियमोें को ध्यान में रखते हुए। हालांकि, मंदिर प्रबंध समिति ने संभावित श्रद्धालुओं की भीड़ के लिए अपनी तैयारियां प्रारंभ कर दी हैं, जिसके लिए बाबा साहब मंदिर प्रबंध समिति की बैठक संपन्न हुई। मेला आयोजन के लिए सोशल डिस्टैंसिंग के साथ साथ अन्य सभी प्रकार की गाइडलाइंस के तहत इसे संपन्न कराने के लिए चर्चा हुई। ज्ञात हो कि, जनपद के सीमावर्ती क्षेत्र के प्रमुख तीर्थों में पंचनद संगम का अग्रणी स्थान है। यहां सैकड़ों वर्षों से प्रति वर्ष कार्तिक पूर्णिमा पर आठ दिवसीय विराट मेला लगता है एवं प्रतिदिन लाखों लोग पंचनद के पवित्र जल में स्नान करके अकाल मृत्यु के भय से मुक्त होते हैं। इस वर्ष पंचनद स्नान मेला का शुभारंभ 30 नवंबर से होगा। इसके लिए वर्षों की परंपरानुसार एक दिन पूर्व अर्थात 29 नवंबर से ही श्रद्धालुओं का जमावड़ा होना चाहिए, लेकिन इस वर्ष कोविड-19 वैश्विक महामारी के कारण देश में भय का माहौल है। अतः गत वर्षों की तुलना में इस वर्ष स्नानार्थियों की संख्या में भारी कमी होने की संभावना है। पंचनद स्थित श्री बाबा साहब मंदिर प्रबंध समिति द्वारा स्नान पर्व पर होने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ की संभावना के मद्देनजर अपनी तैयारियों की बैठक श्री बाबा साहब मंदिर सम्पन्न हुई। जिसमें मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष हरगोविंद सिंह सेंगर, प्रमोद सिंह सेंगर, विजय द्विवेदी, अंजनी कुमार मिश्रा, वीरेंद्र सिंह सेंगर, महंत सुमेरवन, राजकुमार द्विवेदी, रामअवतार तिवारी, वीर सिंह यादव, प्रधान सोनी "तांत्रिक" सहित क्षेत्रीय संभ्रांत लोग मौजूद रहें। बैठक में तय किया गया कि कार्तिक पूर्णिमा से प्रारंभ होने वाले स्नान मेला में दर्शनार्थियों को मंदिर में प्रवेश के पूर्व सैनिटाइजर से हाथ धोना तथा सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना आवश्यक होगा। साथ ही बगैर मास्क लगाए मंदिर में प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। मेला में मनोरंजन के आइटम एवं झूला आदि संचालित करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। हिन्दुस्थान समाचार/सुनील/मोहित-hindusthansamachar.in