उप्र में शुरू होगी सामूहिक मिनी ग्रीन ट्यूबवेल योजना, कैबिनेट ने दी मंजूरी
उप्र में शुरू होगी सामूहिक मिनी ग्रीन ट्यूबवेल योजना, कैबिनेट ने दी मंजूरी
उत्तर-प्रदेश

उप्र में शुरू होगी सामूहिक मिनी ग्रीन ट्यूबवेल योजना, कैबिनेट ने दी मंजूरी

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लखनऊ, 14 अक्टूबर (हि.स.)। प्रदेश में सिंचाई के लिए सौर ऊर्जा से चलने वाले सामूहिक मिनी ट्यूबवेल स्थापित किए जाएंगे। इसके लिए राज्य सरकार ने निजी लघु सिंचाई कार्यक्रम के तहत ‘सामूहिक मिनी ग्रीन ट्यूबवेल योजना शुरू किये जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। यह योजना नई योजना के रूप में वर्ष 2019-20 से प्रस्तावित की जा रही है। योजना के अन्तर्गत लघु एवं सीमांत श्रेणी के न्यूनतम 10 किसानों के समूह के लिए सौर ऊर्जा चालित नलकूप का निर्माण कराया जाना प्रस्तावित है। एक नलकूप की लागत 4.69 लाख रुपये आंकलित की गई है, जिसमें सामान्य श्रेणी के लिए केन्द्रांश 0.7305 लाख रुपये तथा राज्यांश 2.4215 लाख रुपये एवं कृषक समाज का अंश 1.5380 लाख रुपये है। एससीपी के लिए केन्द्रांश 0.7305 लाख रुपये, राज्यांश 2.9855 लाख रुपये एवं कृषक समूह का अंश 0.974 लाख रुपये है। योजना के अन्तर्गत नलकूप का कार्य लघु सिंचाई विभाग द्वारा तथा सोलर पम्प की स्थापना कृषि विभाग द्वारा किया जायेगा। कुसुम योजना-बी हेतु कृषि विभाग नोडल विभाग है। एक नलकूप से 6 हेक्टेयर शुद्ध क्षेत्र सिंचित होगा तथा 10 हेक्टेयर सिंचन क्षमता सृजित होगी। योजना के अन्तर्गत 69 मी. तक गहरे नलकूप का निर्माण कराया जाना प्रस्तावित है। नलकूप स्थापना के साथ-साथ पम्प हाउस, जल वितरण प्रणाली हेतु एचटीपीई पाइप इत्यादि की व्यवस्था का प्रस्ताव है। नलकूप में जल निकासी हेतु पांच हाॅर्स पावर के सौर ऊर्जा चालित पम्प की स्थापना किया जाना प्रस्तावित है। योजना पायलट प्रोजेक्ट के रूप में एक वर्ष के लिए प्रस्तावित की गई है, जिसके अन्तर्गत 179 नलकूपों हेतु वर्ष 2020-21 में 600 लाख रुपये राशि का बजट प्राविधान है। मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार अतिरिक्त बजट की स्वीकृति प्राप्त कर बड़े जनपदों के लिए 10 एवं छोटे जनपदों के लिए 05 सामूहिक नलकूपों के निर्माण हेतु कार्यवाही की जायेगी। योजना के क्रियान्वयन से आर्थिक दृष्टि से अत्यन्त कमजोर लघु एवं सीमान्त कृषक सौर ऊर्जा चालित नलकूप स्थापित कर सकेंगे तथा ऊर्जा एवं जल की बचत होगी। कैबिनेट के फैसले के मुताबिक यह योजना प्रदेश अतिदोहित विकास खण्डों को छोड़कर शेष में क्रियान्वित की जाएगी। इस योजना का मूल्यांकन किया जाएगा। मूल्यांकन में सार्थक परिणाम आने पर आगामी वर्षों में योजना का विस्तार किये जाने पर निर्णय किया जाएगा। हिन्दुस्थान समाचार/संजय-hindusthansamachar.in