उप्र में दिव्यांगजन खिलाड़ियों को सामान्य खिलाड़ियों की तरह मिलेंगी सुविधाएं
उप्र में दिव्यांगजन खिलाड़ियों को सामान्य खिलाड़ियों की तरह मिलेंगी सुविधाएं
उत्तर-प्रदेश

उप्र में दिव्यांगजन खिलाड़ियों को सामान्य खिलाड़ियों की तरह मिलेंगी सुविधाएं

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-दिव्यांग खिलाड़ियों को भी लक्ष्मण व रानी लक्ष्मी बाई पुरस्कार से किया जाएगा सम्मानित लखनऊ, 05 अक्टूबर (हि.स.)। योगी सरकार दिव्यांगजन खिलाड़ियों को भी सामान्य खिलाड़ियों की तरह सभी आवश्यक सुविधाएं एवं पुरस्कार प्रदान करेगी। दिव्यांग खिलाड़ियों को सामान्य खिलाड़ियों की तरह पुरस्कार, विशेष प्रशिक्षण एवं किट दिये जायेंगे। इसके साथ ही दिव्यांग खिलाड़ियों को लक्ष्मण पुरस्कार, रानी लक्ष्मी बाई पुरस्कार दिया जायेगा। इसके अलावा प्रदेश के भूतपूर्व प्रसिद्ध खिलाड़ियों तथा पहलवानों को वित्तीय सहायता, प्रदेशीय क्रीड़ा संघों तथा क्लबों को प्रतियोगिताओं के आयोजन के लिए भी आर्थिक सहायता मुहैया कराई जायेगी। प्रमुख सचिव खेल कल्पना अवस्थी ने बताया दिव्यांग जन खिलाड़ियों और प्रदेशीय क्रीड़ा संघों के मान्यता, सम्बद्धता के लिए आवश्यक पात्रताएं निर्धारित की गई हैं। आवश्यक अर्हताएं पूर्ण करने, गाइडलाइन्स स्वीकार करने वाले दिव्यांगजन प्रदेशीय खेल संघों को ही मान्यता प्रदान की जायेगी। दिव्यांगजन प्रदेशीय खेल संघों के माध्यम से प्राप्त प्रस्ताव—आवेदन, जो वर्तमान कैलेण्डर वर्ष में खेल निदेशालय को प्राप्त होंगे, उन्हीं पर नियमानुसार पुरस्कार व अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराये जाने पर विचार किया जायेगा। संघ के पदाधिकारियों का चुनाव संबंधित प्रदेशीय दिव्यांगजन खेल संघ के संविधान के अनुसार होगा। प्रमुख सचिव खेल ने बताया कि मान्यता प्राप्त मिनी,कैडेट,सब जूनियर,जूनियर,यूथ,सीनियर वर्ग की राष्ट्रीय चैंपियनशिप में पदक विजेता खिलाड़ियों तथा अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त पैरा ओलंपिक गेम्स, पैरा काॅमनवेल्थ गेम्स, पैरा एशियन गेम्स, पैरा वल्र्डकप में पदक विजेता दिव्यांगजन खिलाड़ियों को नियमानुसार पुरस्कार राशि प्रदान की जायेगी। उन्होंने बताया कि दिव्यांगजन खिलाड़ियों को लक्ष्मण पुरस्कार, रानीलक्ष्मी बाई पुरस्कार से सम्मानित किया जायेगा। प्रसिद्ध दिव्यांगजन खिलाड़ियों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का प्राविधान किया गया है। उन्होंने बताया कि ऐसे दिव्यांगजन खिलाड़ियों को भी पात्र माना जायेगा जो उत्तर प्रदेश का वास्ततिक मूल निवासी हो। दिव्यांगजन टीम का प्रतिनिधित्व किया हो। इसके साथ ही प्रदेश के किसी मान्यता प्राप्त विद्यालय, महाविद्यालय—विश्वविद्यालय का छात्र रहा हों। प्रमुख सचिव ने बताया कि संबंधित प्रदेशीय दिव्यांगजन खेल संघों को प्रत्येक वर्ष कम से कम दो प्रतियोगिताएं आयोजित कराया जाना अनिवार्य होगा। उन्होंने बताया कि दी गई वित्तीय सहायता से संबंधित आय व्यय विवरण एवं उपयोगिता प्रमाण पत्र निर्धारित तिथि तक उपलब्ध ना कराये जाने पर आगे अनुदान स्वीकृत किये जाने पर विचार नहीं किया जायेगा। नियमानुसार वसूली की कार्यवाई की जायेगी। खेल संघ द्वारा वांछित सूचनाएं उपलब्ध ना कराये जाने की दशा में निदेशक खेल विभाग द्वारा संघ की अन्य सुविधाओं को रोक दिया जाएगा। हिन्दुस्थान समाचार/संजय-hindusthansamachar.in