आस्तीक स्वामी मंदिर : आस्था के साथ जीवन मांगने आते हैं भक्त, फूल की जगह लकड़ियों से होती है पूजा
आस्तीक स्वामी मंदिर : आस्था के साथ जीवन मांगने आते हैं भक्त, फूल की जगह लकड़ियों से होती है पूजा
उत्तर-प्रदेश

आस्तीक स्वामी मंदिर : आस्था के साथ जीवन मांगने आते हैं भक्त, फूल की जगह लकड़ियों से होती है पूजा

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रायबरेली, 23 जुलाई (हि.स.)। मंदिर आस्था और विश्वास का केंद्र होते हैं लेकिन एक ऐसा मंदिर भी है जहां आस्था के साथ साथ लोग जीवन मांगने आते हैं और उनका विश्वास है कि यहां आकर उनके प्राणों की रक्षा जरूर होगी। रायबरेली से 15 किमी दूर लालुपुर गांव में महर्षि आस्तीक की तपस्थली पर बना प्राचीन मंदिर भक्तों के इसी विश्वास का गवाह है। नागपंचमी के दिन यहां लोगों का हुजूम उमड़ता है। मान्यता है कि इसी स्थान पर महर्षि आस्तिक तपस्या करते थे। उनके द्वारा बनाये गए हवनकुंड आज भी विद्यमान है। पौरणिक मान्यता है कि महाभारत काल के बाद जब तक्षक नाग ने राजा परीक्षित के प्राण हर लिए थे तो इससे क्रोधित होकर उनके पुत्र जनमेजय ने नागयज्ञ किया था जिसमें कई प्रमुख नागों का विनाश हुआ था। उस समय महर्षि आस्तीक ने नागों की रक्षा की थी, जिससे नाग देवता ने उन्हें आस्तीक मुनि को वादा किया था कि जहां भी उनका नाम लिया जाएगा वहां नागों से किसी को नुकसान नहीं होगा। लकड़ियों से होती है पूजा मंदिरों और देवालयों में हर जगह पूजा पाठ में फूलों का प्रयोग किया जाता है लेकिन महर्षि आस्तीक का ऐसा मंदिर है जहां फूल की जगह लकड़ियों का प्रयोग किया जाता है।इन लकड़ियों को मानव आकृति के रूप में माना जाता है। इन्हें आस्तीक बाबा का पहरेदार कहा जाता है। यह लकड़ियां भी एक विशेष पेड़ की होती हैं। भक्त मंदिर के समीप बहने वाली सई नदी में नहाते हैं और भीगे वस्त्र में ही मंदिर में पूजा अर्चना करते हैं। यहां का विशेष प्रसाद जिसे खम्हरिया कहते हैं चढ़ाया जाता है। यहां दर्शन और पूजन करने वालों की भीड़ उमड़ती है। शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को लगता है मेला आस्तीक बाबा के मंदिर में वैसे तो हर सोमवार को भीड़ होती है लेकिन सावन शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को यहां विशाल मेला लगता है। बुजुर्गों का मानना है कि इस दिन बाबा स्वयं भक्तों को दर्शन देते हैं। हालांकि नागपंचमी को भी मेला लगता है और पूजा पाठ होता है लेकिन चतुर्थी को विशेष पूजा इस मंदिर की खास विशेषता है। मंदिर में दर्शन के लिए दूर दूर से भक्त आते हैं। आसपास के कई जनपदों के लोगों से मंदिर परिसर पटा रहता है। पहली बार कोरोना संकट से बन्द रहेगा मंदिर मंदिर के इतिहास में शायद यह पहला अवसर होगा जब मंदिर के द्वार भक्तो के लिए नही खुलेंगे। कोरोना संकट के कारण इस प्रसिद्ध स्थान में भक्तों को आने की अनुमति नहीं मिलेगी। मंदिर के प्रबंधन का कहना है कि इस बार मंदिर आम श्रद्धालुओं के लिए बंद रहेगा केवल सामान्य पूजा ही कोरोना गाइडलाइन के अनुसार की जाएगी। हिन्दुस्थान समाचार/रजनीश/दीपक-hindusthansamachar.in