अस्थायी डाक्टर के भरोसे जर्जर राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल
अस्थायी डाक्टर के भरोसे जर्जर राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल
उत्तर-प्रदेश

अस्थायी डाक्टर के भरोसे जर्जर राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल

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अस्पताल की भूमि पर किया जा रहा अतिक्रमण मीरजापुर, 17 जुलाई (हि.स.)। लालगंज तहसील के बरौंधा स्थित राजकीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सालय अस्पताल बदहाली की मिसाल बन गया है। सप्ताह में तीन दिन डाक्टर बाकी दिन फर्मासिस्ट व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के सहारे जर्जर अस्पताल चल रहा है। बरौंधा राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल मरम्मत के अभाव में जर्जर हो गया है। बरसात होने पर छत झरना बना जाता है। लिहाजा पूरा पानी छत के सहारे कमरे में चला आता है। जब डाक्टर आते हैं तो पहले कमरे में भरा बरसाती पानी बर्तन से बाहर निकालते हैं। इसके बाद मरीजों को देखते हैं। दीवारों में सीलन और नमी तो सौगात बन गई है। सीलन के वजह से कमरे में समय गुजारना खासा मुश्किल होता है। रही सही कसर आसपास के धंधेबाज पूरी कर दे रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि अस्पताल की भूमि पर ही एक व्यक्ति ने गिट्टी-बालू, सीमेंट आदि का दुकान कर रखा है। सामान लादने-उतारने के लिए ट्रैक्टर दौड़ा कर परिसर में कींचड़, गंदगी कर दिया है। इन सब दुश्वारियों के बावजूद इसके आसपास के गरीब बीमार होने पर अयुर्वेदिक चूरन-चटनी लेने के लिए पहुंचते हैं। बारह वर्ष से अस्थाई चिकित्सक वर्ष 2008 में प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. विनोद कुमार सिंह के जाने के बाद अस्पताल को स्थायी डाक्टर नहीं मिले। इस बीच कुछ समय तक फार्मासिस्ट के सहारे तो कुछ समय तक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी खेवनहार रहा। जनता की शिकायत पर फिर फार्मासिस्ट की नियुक्ति हुई। मौजूदा समय में जिला मुख्यालय के लोहंदी अस्पताल के डाक्टर प्रीतम सिंह हफ्ते में तीन दिन बैठते हैं। बरसात में टपक रहे छत के बारे में डॉ. प्रीतम सिंह ने बताया कि इसकी जानकारी जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी को दे दी गई है। हिन्दुस्थान समाचार/गिरजा शंकर/विद्या कान्त-hindusthansamachar.in