अमृत पेयजल योजना : पानी से निकलने वाले कचरे से बनेगा जैविक खाद
अमृत पेयजल योजना : पानी से निकलने वाले कचरे से बनेगा जैविक खाद
उत्तर-प्रदेश

अमृत पेयजल योजना : पानी से निकलने वाले कचरे से बनेगा जैविक खाद

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नगर के पेयजल पुर्नगठन योजना के तहत 35 प्रतिशत काम पूरा मीरजापुर, 17 अक्टूबर (हि.स.)। अटल मिशन फॉर रेज्यूनेशन एवं अर्बन ट्रांसफर्मेशन (अमृत) योजना के अंतर्गत नगरीय पेयजल पुनर्गठन योजना की क्लीयर वाटर सप्लाई के साथ अन्य खासियत यह है कि वाटर प्यूरीफिकेशन के बाद निकलने वाल कचरे से जैविक खाद भी बनाया जाएगा। जिसे खेतों प्रयोग कर किसान अपने खतों की ऊर्वरा शक्ति और फसलों की उत्पादकता बढ़ा सकते हैं। नगर के लिए सरफेस वाटर आधारित लगभग 400 करोड़ की लागत वाली पेयजल पुनर्गठन योजना का कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। शास्त्री पुल के समीप गंगा में बन रहे इंटेक वेल से गंगा जल उठाकर नगर के लालडिग्गी स्थित जलकल परिसर में बन रहे वाटर सटलर (ट्रीटमेंट प्लांट) तक रॉ वाटर पानी पहुंचेगा। सस्पेंडेड डिजाल्व, मेटल, कार्बनिक कलर्स आर्डर (दुर्गम) इनलेट चेम्बर में जाएगा। जहां इनलेट लैस मिक्सिंग, केमिकल के बाद सेटलर में पहुंचेगा। इस दौरान फिल्टर, मीडिया से होते हुए गंगा जल की बैक वाशिंग की प्रक्रिया से गुजरते हुए सीडब्ल्यूआर में चला जाएगा। इसके बाद पानी का क्लोरिनेशन के बाद क्लीयर वाटर नगरवासियों को सप्लाई की जाएगी। इस लंबी मशीनी प्रक्रिया के दौरान थिकनर से कचरा निकलेगा। जिसके आर्गेनिक कचरे का जैविक केक बनाया जाएगा। सीवरेज वाटर ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से शहर के नाले के गंदे जल से छनकर निकलने वाले कचरे से जैविक खाद बनाने का कार्य तो पहले से नगर के पक्का पोखरा पर हो रहा है। लेकिन जलापूर्ति की विभिन्न प्रक्रिया से गुजरने के बाद निकले आर्गेनिक स्लज से केक बनाने की पहली योजना है। अधिशासी अभियंता अभाव खंड जलकल मीरजापुर पंकज रंजन ने कहा कि अमृत योजना के तहत पेयजल पुनर्गठन योजना नगर वासियों के लिए वरदान होने के साथ ही किसानों के लिए भी उपयोगी है। हिन्दुस्थान समाचार/गिरजा शंकर/विद्या कान्त-hindusthansamachar.in