अपना जीवन अपनी जिम्मेदारी है, लापरवाही में तो खतरा भारी है - पद्मश्री, अशोक चक्रधर

अपना जीवन अपनी जिम्मेदारी है, लापरवाही में तो खतरा भारी है - पद्मश्री, अशोक चक्रधर
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जयपुर,19 मई (हि.स.)। पूरे विश्व में एब्डोमनल कैंसर डे आज मनाया गया। पेट के इस कैंसर की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए मुख्य कार्यक्रम के रूप में एक वर्ल्ड वाइड वेबिनार का आयोजन किया गया जिसमे पुरे विश्व से अनेक एक्सपर्ट और अन्य जानी-मानी हस्तियां जुड़ें। इस कार्यक्रम का आयोजन एब्डोमिनल कैंसर ट्रस्ट और आई.आई.ई.एम्.आर द्वारा किया गया है। वेबिनार के मुख्य अतिथि पद्मश्री, प्रसिद्ध लेखक और कवि, अशोक चक्रधर ने वेबिनार की शुरुआत की। उन्होने अपने चित परिचित अंदाज में एक कविता के जरिये कार्यक्रम की शुरुआत की जिसमें डॉ. संदीप जैन द्वारा किए गये कार्यों का उल्लेख करते हुए उनकी सराहना की। अशोक चक्रधर ने कहा कि ‘अपना जीवन अपनी जिम्मेदारी है, लापरवाही में तो खतरा भारी है‘; ‘कैंसर हो गया तो समझो मौत का फरमान है, किन्तु रोगी भी यही है और सफल इलाज भी‘। पेट जो होता है जीवन की घुरी, उसमें अगर चलती रहे दर्द की छुरी, कब्ज हो पेट में या अपहारा हो, अपच हो और पीड़ा से नहीं छुटकारा हो, वहां की हरियाली में लोहे के पिंड के साथ कोई पत्थर की शिला हो और एक कसेली सी कसक का रह-रहकर उठने वाला सिलसिला हो, अचानक वजन कम या ज्यादा होने लगे, फिर भी कुछ खाया न जाये, दर्द कहां है बताया न जाये, कभी लगे जैसे अंदर कोई अदृश्य घाव हो, बिना किसी चोट ही रक्तस्राव हो, अरसा हो गया सहते सहते, कष्ट होने पर कुछ नहीं कहते, तुरंन्त डॉक्टर के पास जाये और अपना उपचार कराये। वेबिनार के मुख्य वक्ता, संस्थापक ट्रस्टी, एब्डोमिनल कैंसर ट्रस्ट, डॉ संदीप जैन ने अपनी प्रेजेंटेशन में बताया कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, असमय खान पान की वजह से न केवल हमारी दिनचर्या अस्त व्यस्त हुई है बल्कि स्वास्थ्य पर भी विपरीत प्रभाव पड़ा है आज 90 से 95ः कैंसर पर्यावरण और जीवन शैली कारणों से संबंधित होते हैं और केवल 5-10ः वंशानुगत आनुवंशिकी (वंशानुगत) के कारण से होते हैं। गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल और बेरिएट्रिक सर्जरी के क्षेत्र में 15 साल के अपने अनुभव में, मैने देखा है कि अधिकांश लोग शुरुवाती लक्षणों के पीछे संभावित गंभीर बीमारियों और उनके जीवन के लिए जोखिम के बारे में अनजान होते हैं। पेट की बीमारियों ने अभी भी समाज के सभी शैक्षिक, वित्तीय और सामाजिक वर्गों के लोगों का ध्यान आकर्षित नहीं किया है, हमारे समाज को ऐसे संभावित जानलेवा बिमारियों के बारे में जागरूक नहीं है ये चिंता का विषय है। इसके उपरांत वेबिनार में एबडोमिनल केंसर सरवाईवरस ने अपने अनुभव शेयर किए। एक मोबाइल एप्लीकेशन का भी अनावरण किया गया जो कि सिर्फ एब्डोमिनल कैंसर से रिलेटेड कारणों और रोकथाम पर आघारित है। इस मोबाइल एप्लीकेशन में सभी प्रकार की एब्डोमिनल कैंसर रिलेटेड प्रॉब्लम्स के सिम्टम्स उनका परीक्षण और उनके रोकथाम के बारे में जानकारी दी गई है व यह 13 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है। मोबाइल एप्लीकेशन वर्ल्ड वाइड अवेलेबल है और सभी एब्डोमिनल कैंसर मरीजों के लिए लाभदायक सिद्ध होगी। वेबिनार में विशिष्ट अतिथि डॉ. एस.एस.शर्मा (एमडी, डीएम) वरिष्ठ प्रोफेसर, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग, एसएमएस मेडिकल कॉलेज, जयपुर ने बताया कि वर्तमान में चल रहे कोरोना काल में हम सब ये अच्छे से जान चुके है कि हम अपनी सेहत को लेकर कितने सजग है। यही बात पेट के कैंसर और मोटापे पे भी लागू होती है। ये कुछ ऐसे ही बढ़ता है और बेहद ज़रूरी है कि हम इसके शुरुवाती लक्षणों को जाने। हालात बेहद ख़राब है, संक्रमण को लेकर कैंसर के मरीजों व उनके परिजनों की चिंताएं बड़ गई क्योंकि कैंसर होने से कोविड-19 संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। क्योंकि कैंसर रोगियों की प्रतिरक्षण क्षमता कम होती है और इससे शरीर में बिमारियों से लड़ने की क्षमता भी कम। कैंसर के मरीजों के लिए वही सावधानियां हैं जो सामान्य जन के लिए, बस इसके अनुपालन में सख्ती बरतना जरूरी है। हिन्दुस्थान समाचार/दिनेश/ ईश्वर

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