The influx of tourists increased with the wildlife to make the New Year memorable.
The influx of tourists increased with the wildlife to make the New Year memorable.
राजस्थान

वादियों में वन्य जीवों के साथ नए साल को यादगार बनाने के लिए सैलानियों की आमद बढ़ी

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सवाई माधोपुर, 29 दिसम्बर (हि.स.)। नववर्ष को लेकर राजस्थान सरकार की ओर से की गई सख्ती और छुट्टियों के कारण 392 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला रणथंभौर नेशनल पार्क इनदिनों देसी सैलानियों के वीकेंड एन्जॉय का पसंदीदा स्थल बना हुआ है। इन दिनों रणथंभौर में बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंच रहे है। पर्यटकों की संख्या में इजाफा होने से होटल और पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों के चेहरे खिले हुए है। नए साल का जश्न मनाने के लिए सवाई माधोपुर स्थित रणथंभौर एक बार फिर तैयार हो गया है। हर साल की तरह इस साल भी बड़ी संख्या में सैलानी रणथंभौर की वादियों में वन्य जीवों के साथ नए साल को यादगार बनाने के लिए बड़ी संख्या में पहुंच रहे है। इन दिनों रणथंभौर में पर्यटकों की बहार है। इससे एक ओर जहां कोरोना के कारण दम तोड़ते रणथंभौर के पर्यटन को संजीवनी मिली है, वहीं होटल और पर्यटन से जुड़े लोगों के चेहरे पर मुस्कान लौट आई है। नए साल के आगमन और छुट्टियों के कारण इन दिनों रणथंभौर में बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंच रहे है। रणथंभौर में इस समय पर्यटन अपने पूरे चरम पर है। पर्यटकों की संख्या में इजाफा होने से होटल और पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों के चेहरे खिले हुए हैं। रणथंभौर के तकरीबन सभी होटल और रेस्तरां पर्यटकों से आबाद है। बड़ी बात ये है कि इन दिनों रणथंभौर आने वाले सैलानियों को पार्क भ्रमण के दौरान टाइगर साइटिंग भी बेहद अच्छी हो रही है। बाघों की अठखेलियों को देख कर पर्यटक खासा रोमांचित हो रहे हैं। रणथंभौर में पर्यटकों की भीड़ के दबाव के कारण पार्क भ्रमण पर जाने वाले वाहनों की संख्या कम पडऩे लगी है। ऐसे में जिन पर्यटकों की ऑनलाइन बुकिंग नहीं हुई है या जिन्हें वाहन नही मिल पा रहे है वे पर्यटक मायूस नजर आ रहे है। रणथंभौर में वर्तमान में करीब 4500 पर्यटक प्रतिदिन पार्क भ्रमण पर जा रहे हैं, बावजूद उसके कई पर्यटक टिकट नहीं मिलने से पार्क भ्रमण से वंचित रह रहे हैं। पर्यटकों के बढ़ते दबाव के बीच इन दिनों रणथंभौर में कई अव्यवस्थाएं भी है। कई पर्यटकों को समय पर बोर्डिंग पास नहीं मिल पा रहे हैं तो कई पर्यटकों को पसंदीदा जोन नही मिल पा रहा है। रणथंभौर के पर्यटन एसीएफ सुमित बंसल का कहना है कि रणथंभौर में वाहनों की संख्या निर्धारित है, जिसके तहत प्रति पारी 140 वाहन ही पार्क भ्रमण पर भेजे जा रहे हैं। सभी वाहन पूरी तरह से फुल हैं। रणथंभौर नेशनल पार्क राजस्थान में स्थित देश के सबसे अच्छे बाघ अभ्यारण्यों में से एक है, जिसे यहां उपस्थित फ्रेंडली बाघों के लिए जाना जाता है। विंध्य और अरावली पहाडिय़ों की तलहटी में बसे रणथंभौर को अपने बाघ भंडार, वनस्पतियों और जीवों की विविधता के लिए जाना जाता है। रणथंभौर नेशनल पार्क 1955 में भारत सरकार द्वारा सवाई माधोपुर खेल अभयारण्य के रूप में स्थापित किया गया था। 1973 में इस पार्क को प्रोजेक्ट टाइगर रिजर्व घोषित कर दिया गया था और 1980 में इसे राष्ट्रीय उद्यान बनाया गया था। साल 1991 में यह पार्क कैलादेवी अभयारण्य और सवाई मान सिंह अभयारण्य रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान का हिस्सा बन गया। इस पार्क का नाम रणथंभौर किले के नाम पर रखा गया था और यह उत्तर में बनास नदी और दक्षिण में चंबल नदी से घिरा हुआ है। पार्क में जानवरों, पक्षियों, उभयचरों, सरीसृपों और वनस्पतियों और जीवों की कई विदेशी प्रजातियों के साथ दिव्य बाघों की प्रजाति भी पाई जाती है। हिन्दुस्थान समाचार/रोहित/ ईश्वर-hindusthansamachar.in