राजस्थान में 38 लाख महिलाओं के लिए ‘उज्जवला’ की लौ तले महंगाई का अंधेरा

राजस्थान में 38 लाख महिलाओं के लिए ‘उज्जवला’ की लौ तले महंगाई का अंधेरा
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जयपुर, 09 जून (हि.स.)। राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्र में लकडिय़ां चुनकर चूल्हे की आग जला कर दो जून की रोटी पकाने वाली महिलाएं अब दोबारा फूंकणी में फूंक मार कर चूल्हा जलाने को मजबूर है। केन्द्र सरकार की उज्जवला योजना के तहत इन महिलाओं को चूल्हे की आग से बचाने के लिए मुफ्त गैस कनेक्शन दिए गए, लेकिन गैस सिलेण्डर के लगातार बढ़ते दामों की वजह से राजस्थान की लगभग 38 लाख महिलाओं का गैस सिलैण्डर से मोह भंग हो गया है। रसोई गैस की आसमान छूती कीमतों के कारण गैस के दाम 850 रुपये के करीब पहुंच गए हैं। एक तरफ कोरोना संकट में उपजी आर्थिक तंगी है तो दूसरी तरफ गैस के दामों में आग लग चुकी है। ऐसे में महिलाओं को केन्द्र सरकार की उज्जवला योजना में मिला रसोई गैस का सिलेण्डर 850 रुपये में भरवाना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की महिलाओं को महंगा पड़ रहा है। रसोई गैस के दामों ने आम लोगों के घर का बजट बिगाड़ दिया है। कोरोना काल के इन 14 महीने में 38 लाख महिलाओं ने उज्ज्वला योजना में मिले गैस सिलेण्डर को घर के कोने में रख दिया है। ऐसे में ग्रामीण महिलाएं खेत से लकडिय़ां चुनकर चूल्हे के लिए ईंधन का इंतजाम करने लगी हैं। गैस सिलैण्डर पर मिलने वाली सब्सिडी डेढ़ साल पहले ही खत्म हो चुकी है। साथ ही गैस के दाम भी बढक़र 850 रुपये के करीब पहुंच गए है। ऐसे में जयपुर की सोहनी देवी, फागी की कमला और चूरू की सुनीता देवी जैसी लाखों गृहणियां दोबारा चूल्हे में फूंक मारने को मजबूर हो गई है। इन महिलाओं का कहना हैं कि कोरोना काल में काम-धंधे बंद हैं। गैस के दाम भी आसमान छू रहे हैं। ऐसे में महंगा सिलैण्डर नहीं खरीद सकते, इसलिए चूल्हे पर रोटी बनाने की मजबूरी हैं। एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर फेडरेशन राजस्थान की मानें तो पिछले 14 महीनों में गैस सिलैण्डर 523 से बढक़र 813 रुपये का हो गया है। राजस्थान के 38 लाख लोगों ने सिलेण्डर लेना बंद कर दिया है। ये वही लोग हैं जिन्हें सरकार उज्ज्वला योजना के तहत सस्ता सिलैण्डर दे रही थी। अकेले राजधानी जयपुर में कुल 3.5 लाख में से करीब 2 लाख उपभोक्ता सिलैण्डर छोडक़र चूल्हे पर खाना बनाने को मजबूर हो गए हैं। इस वर्ग में या तो अद्र्ध बेरोजगार हैं या दिहाड़ी पर काम करने वाले लोग हैं। उज्ज्वला योजना के तहत राजस्थान के कुल 65 लाख लोगों को सस्ता सिलेण्डर मिल रहा था। इनमें से 60 प्रतिशत लोग सिलेण्डर लेना बंद कर चुके हैं। एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर फेडरेशन राजस्थान के महासचिव कार्तिकेय गौड़ कहते हैं कि गैस के लगातार बढ़ते दामों की वजह से 60 फीसदी लोगों ने उज्ज्वला योजना में मिलने वाली गैस का उपयोग बंद कर दिया है। 40 फीसदी लोग भी साल में महज एक या दो बार ही गैस भरवा रहे है। गौड़ कहते हैं कि लोगों के रसोई गैस इस्तेमाल बंद के पीछे दो बड़े प्रमुख कारण हैं। एक तो गैस के दाम बहुत ज्यादा हो गए। वर्तमान में 813 रुपये का सिलैण्डर मिल रहा है। दूसरा कारण गैस सिलैण्डर पर कोई सब्सिडी नहीं मिल रही है। प्रदेश में 1.75 करोड़ गैस उपभोक्ता हैं। इनमें से 32 लाख अकेले जयपुर में हैं। प्रदेश में एक माह में 1 करोड़ 12 लाख और जयपुर में 28 लाख सिलैण्डर की खपत होती है। अब यह घटकर आधी ही रह गई है। एलपीजी फेडरेशन ऑफ राजस्थान ने सुझाव दिया है कि केंद्र सरकार को चाहिए कि कोरोनाकाल के दौरान जीएसटी पूरी तरह से माफ कर दे। उज्जवला योजना के तहत उपभोक्ताओं को 5 किलो वाले सिलैण्डर देने का सुझाव भी दिया गया है, ताकि लोगों का 20-25 दिन का गुजारा हो सके। कारण यह भी है कि गरीब वर्ग एक साथ 813 रुपए का सिलेण्डर खरीदने में असमर्थ है। हिन्दुस्थान समाचार/रोहित/संदीप