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राजस्थान

शहर में सुहागिनों ने व्रत रखा, घर की शांति के लिए दशा माता की पूजा

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जोधपुर, 06 अप्रैल (हि.स.)। शहर में मंगलवार की सुबह सुहागिनों ने घर की खुशहाली और दशा के लिए दशा माता की विशेष रूप से पूजा अर्चना की। महिलाओं में सामूहिक रूप से पूजा अर्चना के साथ ही दशा माता कहानी का पठन पाठन कर सुनाया। व्रतोपवास के बाद पति से भी आशिष लिया। मंगलवार को दशा माता मन्दिर में महिलाओं व्रत रखकर दशा माता की पूजा-अर्चना की। महिलाएं जीवन की दिशा- दशा को सही करने की कामना से चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की दशमी के दिन दशा माता का व्रतकर पूजा करती है। इस व्रत को जो व्यक्ति भक्ति-भाव से करता है, उसके घर से दु:ख और दरिद्रता दूर हो जाती है। पंडित रामेश्वर महाराज ने बताया कि मंगलवार को सुबह से दशा माता मन्दिर में पूजा करने के लिए महिलाओं की चहल-पहल रही। मन्दिर में महिलाएं पूजा की थाली लेकर आई तथा दशा माता व पीपल पूजा अर्चना की। इस अवसर पर दामोदर महाराज द्वारा महिलाओं दशा माता की कथा सुनाई गई। दामोदर महाराज ने कथा दौरान कहा कि प्राचीन समय में राजा नल और दमयंती रानी सुखपूर्वक राज करते थे। उनके दो पुत्र थे। उनके राज्य में प्रजा सुखी और सम्पन्नथी। एक दिन की बात है कि उस दिन होली दसा थी। एक ब्राह्मणी राजमहल में आई और रानी से कहा- दशा का डोरा ले लो। बीच में दासी बोली- हां रानी साहिबा, आज के दिन सभी सुहागिन महिलाएं दशा माता की पूजन और व्रत करती हैं तथा इस डोरे की पूजा करके गले में बांधती हैं जिससे अपने घर में सुख-समृद्धि आती है। अत: रानी ने ब्राह्मणी से डोरा ले लिया और विधि अनुसार पूजन करके गले में बांध दिया। हिन्दुस्थान समाचार/सतीश / ईश्वर