प्रतिज्ञा से बंधे गाड़िया लोहारों के साथ महाराणा प्रताप को किया नमन

प्रतिज्ञा से बंधे गाड़िया लोहारों के साथ महाराणा प्रताप को किया नमन
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उदयपुर, 09 जून (हि.स.)। वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जयंती के उपलक्ष्य में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के तत्वावधान में चल रहे आयोजनों के तहत बुधवार को आयुर्वेद संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में पांच दिवसीय योग वर्चुअल शिविर का आयोजन किया गया। शिविर की शुरुआत महाराणा प्रताप को स्मरण कर मेवाड़ के सिद्ध योग गुरु व योगी गुरु गुमान सिंह एवं बावजी चतुर सिंह की तपोभूमि ‘राम झरोखा’ में दीपदान से हुई। गुरु गुमान सोसायटी अध्यक्ष भवानी प्रताप सिंह ताणा ने मेवाड़ का योग के साथ जुड़ाव समझाते हुए मेवाड़ की स्थापना गुरु हरित ऋषि द्वारा बप्पा रावल को आशीर्वाद व तप के प्रभाव को बताया। वार्ता में बावजी चतुर सिंह एवं उनके गुरु गुमान द्वारा योग तथा साहित्य में अभूतपूर्व योगदान को स्मरण किया गया। विश्वविद्यालय योग केंद्र, समन्वयक डॉ. दीपेंद्र सिंह चौहान ने योग की व्यापक अर्थ की व्याख्या करते योग को अपनाकर स्वयं तथा अपने आसपास के वातावरण को भी अधिक स्वस्थ रखने का लाभ बताया। चैहान ने गुरु गुमान सिंह एवं बावजी चतुर सिंह के साहित्य एवं योग के योगदान सम्बन्धी साहित्य को विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में जोड़ने की बात कही तथा युवाओं को योग के पाठ्यक्रम से जोड़ जीवन में योग को नियम बना अपने समाज को निरोगी रखने की शपथ लेने को कहा। सुकृपा फाउंडेशन के संस्थापक योगगुरु सुरेश पालीवाल ने प्राणायाम एवं ध्यान के अभ्यास सत्र के दौरान महाराणा प्रताप के महान व्यक्तित्व को अंतर्दृष्टि से आत्मसात करते हुए दिव्य ध्यान कराया। योग प्रशिक्षक प्रीतम सिंह चुंडावत ने महाराणा प्रताप को 101 सूर्य नमस्कार नमन से पांच दिवसीय योग शिविर का प्रारम्भ व नन्हें - मुन्ने योग साधकों को योगाभ्यास व विभिन्न मुद्राओं के फायदे समझाए। अंत में आभार जिलाध्यक्ष यादवेंद्र सिंह रलावता ने व्यक्त किया। समारोह के क्रम में प्रताप नगर सहकारी उपभोक्ता केंद्र स्थित महाराणा प्रताप की प्रतिमा पर अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा ने गाड़िया लोहार परिवारों के साथ पुष्पांजलि अर्पित की। पुष्पांजलि पूर्व आसपास के क्षेत्र की सफाई, प्रतिमा का गंगाजल अभिषेक कर गाड़िया लोहार परिवार के वयोवृद्ध सदस्य प्रकाश ने दीप प्रज्वलित किया। इस मौके पर महासभा के उपाध्यक्ष रणवीर सिंह जोलावास ने कहा कि गाड़िया लोहारों के पूर्वज महाराणा की ही सेना में थे। इन इस्पाती जवानों ने कसम खाई थी कि जब तक महाराणा प्रताप सिंह सिसौदिया चित्तौड़ नहीं पधारेंगे, तब तक वे अपने घर मे नहीं रहेंगे। शताब्दियां बीत जाने पर भी इन्होंने अपनी प्रतिज्ञा नहीं तोड़ी। गाड़िया लोहारों का पहनावा और पारिवारिक ढांचा अब भी वही है। जीवनशैली के हिसाब से इन्हें घूमंतु समुदाय की श्रेणी में रखा गया है। अब भी इनकी भाषा मेवाड़ की ही महक लिए हुए है। बुधवार को ही हाथीपोल स्थित महाराणा प्रताप के अनन्य सहयोगी व परमदानवीर भामाशाह की मूर्ति को नमन किया गया। गुरुवार सुबह 11 बजे अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा - मेवाड़ एवं शिवरती विद्यापीठ संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में ऑनलाइन राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘महाराणा प्रताप पुराण पुरुष’ का आयोजन किया जाएगा। हिन्दुस्थान समाचार/सुनीता कौशल / ईश्वर