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राजस्थान

विवाहित पुत्री को अनुकंपा नियुक्ति का पात्र नहीं मानने सरकार से मांगा जवाब

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जोधपुर, 08 अप्रैल (हि.स.)। राजस्थान हाईकोर्ट ने विवाहित पुत्री को अनुकंपा नियुक्ति के लिए पात्र नहीं मानने को भेदभावपूर्ण बताते हुए नियमों की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। मुख्य न्यायाधीश इंद्रजीत महांति तथा न्यायाधीश विनित कुमार माथुर की खंडपीठ में याचिकाकर्ता मीना कंवर की ओर से अधिवक्ता भरत देवासी ने कहा कि शिक्षक पिता की सेवारत रहते हुए मृत्यु के बाद घर में याची सहित उसकी मां ही आश्रित है। मां द्वारा अनुकंपा नियुक्ति नहीं चाहे जाने पर याची ने आवेदन किया, लेकिन उसे यह कहते हुए मना कर दिया गया कि विवाहित पुत्री मृतक आश्रित की श्रेणी में नहीं आती। अधिवक्ता ने तर्क दिया कि विवाहित पुत्र अनुकंपा नियुक्ति का पात्र है लेकिन विवाहित पुत्री को पात्र नहीं मानना संविधान के अनुच्छेद 14 एवं 15 का उल्लंघन है। खंडपीठ ने अतिरिक्त महाधिवक्ता पंकज शर्मा को नोटिस स्वीकार करने के निर्देश दिए। अगली सुनवाई 12 मई को होगी। हिन्दुस्थान समाचार/सतीश/ ईश्वर