कोटा थर्मल की दो यूनिटें बंद करने की योजना जनता के साथ खिलवाड़- गुंजल

कोटा थर्मल की दो यूनिटें बंद करने की योजना जनता के साथ खिलवाड़- गुंजल
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कोटा, 11 अप्रैल (हि.स.)। कोटा उत्तर के पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजल ने कहा कि कोटा सुपर थर्मल पावर स्टेशन की 1983-84 में स्थापित दो यूनिटें (यूनिट-1 व 2) 37 वर्ष बाद भी निरंतर 24 घंटे बिजली उत्पादन कर रही है। दोनों की उत्पादन क्षमता 110-110 मेगावाट है। लेकिन हाल ही में केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण और पर्यावरण मंत्रालय का गाइडलाइन का हवाला देकर राज्य विद्युत उत्पादन निगम ने दोनों यूनिटों को बंद करने का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजकर कोटा की जनता के साथ खिलवाड़ किया है। गुंजल ने कहा कि पुराने बिजलीघरों में एक यूनिट बिजली उत्पादन के लिये 700 ग्राम कोयले की जरूरत होती है और कोटा थर्मल की दो इकाइयों में यदि 750 ग्राम कोयले की खपत हो रही है तो इतनी सी मात्रा से यूनिटों को ही बंद करने की नौबत कैसे आ सकती है। आंकडों की बात करें तो कोटा थर्मल की पुरानी इकाइयों पर अब कोई लोन या देनदारियां भी नहीं है, इनसे 3.93 रूपये प्रति यूनिट लागत में बिजली मिल रही है जिसे सरकार घरेलू उपभोक्ताओं को 10 रूपये यूनिट में बेच रही है। दूसरी ओर, राज्य सरकार निजी क्षेत्र के बिजलीघरों एवं पडौसी राज्यों से भी महंगी दरों पर बिजली खरीदने पर बाध्य है। जनता को इस बात की जानकारी दी जाये कि अन्य राज्यों से प्रतिवर्ष कितने करोड़ की बिजली खरीदी जा रही है तथा निजी क्षेत्र से बिजली किस दर से ली जा रही है। इससे उर्जा खरीद समझौता (पीपीए) के तहत निजी क्षेत्र के पावर प्लांटों से महंगी दरों पर बिजली खरीदने का पर्दाफाश हो जायेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कांग्रेस सरकार ने कोटा थर्मल की पुरानी यूनिटों को बंद करने का निर्णय लिया तो इससे कोटा उत्तर के 10 हजार कर्मचारी व श्रमिक बेरोजगार हो जायेंगे। कोरोना महामारी के दौर में कोटा शहर आर्थिक संकट से जूझ रहा है। पांच वर्ष में एक भी नया उद्योग नहीं खोलकर निरंतर बिजली पैदा कर रहे कोटा थर्मल को षडयंत्रपूर्वत बंद करने की योजना बनाई गई तो वे थर्मलकर्मियों, अभियंताओं, ठेका श्रमिकों तथा कोटा उत्तर की जनता के साथ सडकों पर जनांदोलन करेंगे। क्योंकि कोटा थर्मल की चार पुरानी इकाइयों को बंद करने से इस क्षेत्र में बेरोजगारी बढेगी, साथ ही छोटे-मोटे सभी कारोबार भी बंद हो जायेंगे। हिन्दुस्थान समाचार/अरविंद/संदीप