प्राइवेट से सरकारी अस्पतालों में रैफर हो रहे है मरीज

प्राइवेट से सरकारी अस्पतालों में रैफर हो रहे है मरीज
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झुंझुनू, 29 अप्रैल(हि.स.)। झुंझुनू में प्राइवेट अस्पतालों के आक्सीजन पर्याप्त मात्रा में नहीं है। जिसके कारण अब वे मरीजों को सरकारी अस्प्ताल के लिए रैफर कर रहे है। झुंझुनू के पंचदेव मंदिर के समीप संचालित झुंझुनू अस्पताल में बीते 24 घंटे में करीब एक दर्जन मरीजों को ऑक्सीजन ना होने के कारण बीडीके अस्पताल झुंझुनू के लिए रैफर किया गया है। परिजन भी इस तरह ऑक्सीजन की कमी के कारण परेशान है। वे कह रहे है कि प्रशासन से भी बार-बार गुहार लगा चुके है। लेकिन ऑक्सीजन नहीं मिल रही है। पांच-पांच, सात-सात दिन से भर्ती मरीजों को हर एक घंटे में चिकित्सक आकर दूसरे अस्पताल में जाने को कह देते है। पैसे देते देते भी ऑक्सीजन नहीं मिल रही है। इधर, अस्पताल संचालक डा. कमलचंद सैनी ने बताया कि उन्हें करीब रोजाना के 40 से 50 सिलेंडर ऑक्सीजन चाहिए। लेकिन उन्हें 24 घंटे में आधे भी सिलेंडर नहीं मिले है। ऐसे में नए मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा। वहीं जो भर्ती है। वेंटिलेटर पर भी नहीं है। उन्हें रैफर किया जा रहा है। यदि यही हालात रहे तो वेंटिलेटर वाले मरीजों को भी रैफर करने के अलावा कोई चारा नहीं है। उन्होंने प्रशासन की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए है। उन्होंने कहा कि ऑक्सीजन की मारामारी में अभी तक प्रशासन निजी अस्पतालों कोटा तक तय नहीं कर पाया है। ताकि हम ऑक्सीजन की आपूर्ति के हिसाब से ही मरीजों को भर्ती करें। झुंझुनू में प्राइवेट अस्पतालों से मरीजों को जिला अस्पताल में रैफर किए जाने के बाद जिला कलेक्टर उमरदीन खान ने प्राइवेट अस्पताल संचालकों से बातचीत की और ऑक्सीजन सप्लाई को लेकर स्थिति जानी। उन्होंने बताया कि ऑक्सीजन की कमी वाली कोई बात नहीं है। कुछ प्राइवेट अस्पताल संचालक यह सोच रहे है कि आने वाले दिनों में उन्हें ऑक्सीजन नहीं मिलेगी। इसलिए वे मरीजों को जिला अस्पताल में भेज रहे है। इसलिए आज सभी को बुलाकर कहा गया है कि मरीजों के अनुपात के मुताबिक सभी को आक्सीजन दी जाएगी। साथ ही चिकित्सकों से भी कहा है कि केंद्र और राज्य सरकार के अनुभवी विशेषज्ञों ने बताया है कि एक निश्चित सेचुरेशन के बाद मरीजों को ऑक्सीजन देने के बाद उसका कोई फायदा नहीं है। ऐसे में इस नई तकनीक का उपयोग कर आक्सीजन का अधिक से अधिक मरीजों में उपयोग करें। इसके बाद भी यदि कोई समस्या आती है तो वे सीधे एडीएम से बातचीत कर सकते है। हिन्दुस्थान समाचार / रमेश सर्राफ / ईश्वर