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राजस्थान

चिकित्सक चारण के स्थानांतरण पर रोक के आदेश

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जोधपुर, 26 फरवरी (हि.स.)। राजस्थान हाईकोर्ट ने मेवाड़ में आगामी विधानसभा उपचुनाव के मद्देनजर राजनीतिक हस्तेक्षप से चिकित्सक शिवपालदान चारण के उदयपुर से राजसमंद किए गए स्थानांतरण आदेश पर रोक लगा दी है। इसके लिए राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए किया छह सप्ताह में जवाब तलब किया है। चिकित्सक शिवपाल चारण की ओर से अधिवक्ता यशपाल खिलेरी ने पैरवी की। न्यायाधीश दिनेश मेहता ने याची के तर्कों और रिकॉर्ड का अनुशीलन कर याचिकाकर्ता को अंतरिम राहत दी। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता यशपाल खिलेरी ने याची चिकित्सक की ओर से रिट याचिका पेश कर बताया कि याची चिकित्सक पद पर पर अपनी संतोषजनक सेवाए दे रहे है और वर्तमान कोरोनाकाल में अपनी उत्कृष्ठ सेवाएं दी है। लेकिन राजनीतिक कारणों से आगामी होने वाले राजसमंद विधानसभा उपचुनाव को देखते हुए राज्य सरकार के उप शासन सचिव ने 17 फरवरी को एक ही आदेश से 22 चिकित्सकों का स्थानांतरण करते हुए 15 चिकित्सकों को उदयपुर से राजसमंद स्थानांतरण कर दिया जिसमें किसी भी तरह की कोई प्रशासनिक आवश्यकता प्रतीत नहीं होती बल्कि मात्र वोटों की राजनीति के चलते सताधारी सरकार राजसमंद सीट जीतने के एक मात्र उद्देशिय से आदेश पारित किया है जो नियमानुसार चलने योग्य नहीं है। याची की पत्नी भी उदयपुर में राजकीय चिकित्सक है। याची की माताजी को भी आंखों से नहीं दिखता, ऐसे में समी देखभाल के लिए भी याची का उदयपुर रहना जरूरी है। याची का स्थानांतरण राजनीतिक कारणों से और बिना किसी प्रशासनिक आवश्यकता के और केवल राजनीतिक फायदा लेने के उद्देश्य से किया गया है जो चलने योग्य नही है। याची का स्थानांतरण उदयपुर जिले से बाहर कर दिया गया है जो राज्य सरकार की पति पत्नी के एक ही स्टेशन पर पदस्थापन के पालिसी के भी विरुद्ध है। याची की ओर से अखबार में छपी खबर की ओर भी न्यायालय का ध्यान आकर्षित कर बताया कि हाई प्रोफाइल राजसमंद विधानसभा सीट को जीतने की नीयत से एकमुश्त स्थानांतरण किये गए है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता खिलेरी ने बताया कि पूर्व न्यायिक दृश्टान्त ओमप्रकाश बनाम सरकार में राजनीतिक कारणों से किये गए स्थानांतरण को निरस्त करते हुए हाइकोर्ट ने निर्धारित किया है कि स्थानांतरण हेतु सक्षम अधिकारी नेताओ के निर्देशों की पालना में स्थानांतरण नही कर सकते। याची की ओर से बताया गया कि राज्य सरकार द्वारा किए स्थानांतरण में कोई प्रशासनिक आवश्यकता प्रतीत नही होती है। याची के अधिवक्ता के तर्कों से सहमत होते हुए हाईकोर्ट ने स्थानांतरण आदेश की क्रियान्विति पर रोक लगाते हुए छह सप्ताह में जवाब तलब किया। हिन्दुस्थान समाचार/सतीश / ईश्वर