अब लोगों को सताने लगी अगले माह आने वाले ईएमआई और बिजली के बिलों की चिंता

अब लोगों को सताने लगी अगले माह आने वाले ईएमआई और बिजली के बिलों की चिंता
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जयपुर, 29 अप्रैल (हि.स.)। अप्रैल माह समाप्त होने वाला है और इसी के साथ लोगों की टेंशन शुरू हो गई है। जिस तरह से प्रदेश में कर्फ्यू लगने के बाद भी कोरोना मामलों में कमी नहीं आई है। कोरोना की इस रफ्तार को देखते हुए सम्भवत कोरोना कर्फ्यू कम लॉकडाउन को 15 दिन तक और बढ़ाया जाता है तो लोगों को अपनी ईएमआई, किराया व अन्य किश्तों का भुगतान करना होगा। क्योंकि किसी भी माह के शुरूआत में ही कंपनियों द्वारा अपने उपभोक्ताओं से ईएमआई व अन्य किश्तें ली जाती हैं। इसी के साथ माह शुरू होते ही किराएदारों को किराया देना होता है व लोगों को बिजली, पानी, दूध का बिल व किराना का बिल भी अदा करना होता है। माह की शुरूआत में जैसे ही सैलेरी आती है इन सभी बिलों का भुगतान आसानी से हो जाता है लेकिन इस बार ऐसा नहीं है। कोरोना महामारी के चलते पिछले 15 दिनों से लोगों के काम धंधे बंद पड़े हैं। बाजार बंद हैं, दुकानें बंद हैं और जो लोग ऑफिसों में काम करते हैं वे भी घर से ही काम कर रहे हैं या फिर कुछ को नौकरी से हाथ धोना पड़ा है। ऐसे में इन बिलों का भुगतान कैसे होगा लोगों को ये समझ में ही नहीं आ रहा है। सरकार ने इस बार लॉकडाउन को जन अनुशासन पखवाड़े का नाम दिया है लेकिन इसमें आवश्यक सेवाओं को छोड़कर बाकी सब बंद कर दिया गया है। सरकार ने मजदूरों का ध्यान रखते हुए फैक्ट्रियों और मजदूरी से जुड़े अन्य कार्यों को चालू रखा है। इससे लॉकडाउन होने के बाद भी अमीर तबका और मजूदर वर्ग तो इससे सुरक्षित है लेकिन मध्यम वर्ग को पूरी तरह से नजरंदाज किया गया है। पिछले एक साल से ज्यादा समय से मध्यम वर्ग ये परेशानी झेल रहा है। साल 2020 में जब लॉकडाउन लगाया गया तब अधिकतर लोगों ने अपनी नौकरी खो दी। वहीं कोरोना की वजह से दुकानें बंद रहीं जिसकी वजह से व्यापारियों को काफी नुकसान झेलना पड़ा। मध्यम वर्ग ने जमा पूंजी और कर्ज लेकर उस वक्त काम चलाया। मध्यम वर्ग अभी पूरी तरह से संभला भी नहीं था कि दोबारा जनअनुशासन पर्व के नाम पर राज्य सरकार द्वारा सब बंद कर दिया गया। कोरोना महामारी को देखते हुए राज्य सरकार द्वारा उठाया गया ये कदम भले ही उचित हो लेकिन इससे मध्यम वर्ग की रोजी- रोटी पर संकट आकर खड़ा हो गया है। पिछला कर्ज पहले ही बकाया है ऐसे में दोबारा कर्ज लेने का तो सवाल ही नहीं उठता है। वहीं नया माह शुरू होते ही ईएमआई और बिलों का भुगतान करना होगा। इसकी व्यवस्था कैसे होगी ये आम आदमी की चिंता का विषय बना हुआ है। 3 मई तक तो जैसे तैसे लोग काम चला लेंगे लेकिन अगर लॉकडाउन की अवधि आगे बढ़ती है तो मध्यम वर्ग की स्थिति काफी गंभीर हो जाएगी। तेजाजी मार्ग सोडाला निवासी फोटोग्राफर मुकेश खर्रा बताते हैं वह शादी समारोह में फोटोशूट का काम करते हैं लेकिन राज्य सरकार द्वारा मनाए जा रहे जन अनुशासन पखवाड़े के तहत सभी शादी समारोह समिति सहित लोगों की आजावाही कम होने की वजह से उसके सभी शादी समारोह स्थगित हो गए है। पिछले एक साल से कोरोना से लड़ते लड़ते दो वक्त की रोटी जुटा पाना भी अब मुश्किल हो गया। वहीं मई के महिने के पहले सप्ताह में उसकी द्वारा फाईनेंस पर लिए गए कैमरों की किश्त आएगी। जिसे दे पाना मुश्किल हो रहा है। सोडाला निवासी दीपक कटारिया का कहना है कि उसने लोन लेकर मकान बनवाया था। लेकिन लॉकडाउन होने के चलते सभी कमरे खाली पडे है। अब अगले माह आने वाले बिजली के बिल को लेकर टेंशन हो रही है। हिन्दुस्थान समाचार/दिनेश / ईश्वर