मुख्यमंत्री गहलोत भाषा के संयम की सीमा लांघ रहे हैं- डॉ. पूनियां
मुख्यमंत्री गहलोत भाषा के संयम की सीमा लांघ रहे हैं- डॉ. पूनियां
राजस्थान

मुख्यमंत्री गहलोत भाषा के संयम की सीमा लांघ रहे हैं- डॉ. पूनियां

news

जयपुर, 24 जुलाई (हि.स.)। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां ने कहा कि मुख्यमंत्री पद पर बैठे किसी भी व्यक्ति से यह अपेक्षा नहीं की जा सकती कि वह अपने कुनबे की कलह में भाषा के संयम की सीमा लांघकर राज्यपाल के लिए धमकी और चेतावनी भरे लहजे में बात करें। मुख्यमंत्री गहलोत ने राजभवन को जनता घेर लेगी, जैसे शब्द बोलकर आपराधिक कृत्य किया है। भाजपा इसकी कड़े शब्दों में निंदा करती है। डॉ. पूनियां शुक्रवार शाम पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया व उप नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ भी मौजूद रहे। पूनियां ने कहा कि देश की शीर्ष अदालत गंभीर संवैधानिक मुद्दों पर सुनवाई कर रही है, दूसरी तरफ मुख्यमंत्री गहलोत अपनी वाणी और लेखनी से पीएम मोदी, गृहमंत्री अमित शाह पर आरोप लगाते-लगाते संयम की सीमा लांघ गए। मुख्यमंत्री राज्यपाल पर अनुचित दवाब बना रहे हैं। लोगों को संवैधानिक प्रमुख के खिलाफ आमजन को भडक़ाने की कोशिश कर रहे हैं, यह मुख्यमंत्री को शोभा नहीं देता है। नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि कैबिनेट ने विधानसभा का सत्र बुलाने का प्रस्ताव राज्यपाल को दे दिया। अब राज्यपाल को तय करना है कि सत्र कब बुलाया जाए। लेकिन इसके लिए अनुचित तरीके से दबाव बनाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार इस समय की स्थिति को देखते हुए केन्द्रीय सुरक्षा बलों को राजभवन के बाहर तैनात करना चाहिए ताकि गरिमाय पद का सम्मान बना रहे। मुख्यमंत्री के बयानों को देखते हुए कानून व्यवस्था राजस्थान पुलिस के भरोसे नहीं छोड़ी जा सकती। प्रतिपक्ष उपनेता राजेन्द्र राठौड़ ने कहा कि विधानसभा का सत्र संवैधानिक तरीकों से बुलाने की प्रक्रिया है। मुख्यमंत्री 48 घंटों के अंतराल में सत्र बुलाने की जिद कर प्रचंड विधायकों के दम पर धमकीभरे लहजों में बात कर रहे हैं। जबकि कैबिनेट के प्रस्ताव के बाद 21 दिन के अंदर राज्यपाल को विधानसभा का सत्र बुलाने का अधिकार है। मुख्यमंत्री राजभवन में जिस तरह का सियासी ड्रामा कर रहे हैं, वह उचित नहीं है। मुख्यमंत्री को यह आशंका है कि जोड़तोड़ कर उन्होंने 97-98 लोगों को होटल में बंधक बनाया, अगर वे कही चले गए तो फिर संख्याबल नहीं आ सकेगा। इसी आशंका को लेकर वे राज्यपाल पर अनुचित दवाब बनाने की कोशिश कर रहे हैं। हिन्दुस्थान समाचार/रोहित/ ईश्वर-hindusthansamachar.in