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राजस्थान

कोरोना के तनाव में लोक कला के रंग भरता लोकानुरंजन मेला

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उदयपुर, 23 फरवरी (हि.स.)। कोरोना की लगातार बढ़ रही चिंता और तनाव के बीच उदयपुर में पहला ऐसा आयोजन हुआ जो ऑनलाइन प्लेटफाॅर्म से निकल कर सजीव मंच पर नजर आया। झीलों, पर्वतों, हरियाली और सतरंगी लोक कलाओं के धनी उदयपुर में कोरोना के लम्बे काल के बाद यानी 11 महीने बाद ढोल की गमक गूंजी तो घुंघरू की छनक भी गूंजी, कालबेलिया की चकरी पूरे परवान से घूमी तो लावणी की लयताल भी कोरोना के तनाव को दूर करने का प्रयास करती नजर आई। चंग की थाप ने आने वाले होली महोत्सव की दस्तक दी तो भांगड़ा ने देश की हर वक्त मुस्कुराती-लहलहाती संस्कृति को प्रस्तुत करते हुए यही संदेश दिया कि चाहे कोरोना हो या कोई और कष्ट, हमारे देश की संस्कृति अक्षुण्ण है और उसमें कष्टों से उबरने का जज्बा है। जी हां, हम उदयपुर के भारतीय लोक कला मण्डल में सोमवार रात शुरू हुए लोकानुरंजन मेले की बात कर रहे हैं। यह मेला हर साल लोक कला मण्डल के स्थापना दिवस पर होता है। इस बार 70वां स्थापना दिवस है। आदिम, लोक एवं कठपुतली के क्षेत्र में कार्यरत अन्तरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त इस संस्था की ओर से की गई इस पहल में देश के विभिन्न कोनों से 250 से अधिक लोक कलाकार उदयपुर पहुंचे हैं। पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र की निदेशक किरण सोनी गुप्ता, जनजाति आयुक्त जितेन्द्र उपाध्याय, संस्था के उपाध्यक्ष रियाज तहसीन, सचिव सत्य प्रकाश गौड़, निदेशक लईक हुसैन की उपस्थिति में शुरू हुए इस लोकानुरंजन मेले के पहले दिन राजस्थान के चकरी, लंगा, कालबेलिया, गेर, सहरिया, ढफ नृत्य, गेर घूमरा तथा कथौड़ी नृत्य, गुजरात के राठवा, महाराष्ट्र के लावणी व कोली, आसाम के बीहू, पंजाब के भांगडा, कर्नाटक के पूजा कुनिथा, केरल के ओपना एवं तेलंगाना के वोगू ढोलु तथा बोनला कोलाट्टम लोक नृत्यों की प्रस्तुतियों ने ‘मिनी शिल्पग्राम’ मेले की झलक साकार कर दी। इस बार विश्व प्रसिद्ध शिल्पग्राम मेला भी कोविड की गाइडलाइन के कारण नहीं हो पाया और यह लोकानुरंजन मेला उदयपुरवासियों के लिए इसकी कमी को पूरा करता नजर आया। कार्यक्रम से पूर्व देश के विभिन्न प्रन्तों से आए कलाकारों ने लोक कला मण्डल परिसर से लोक कला मण्डल सर्कल तक शोभा यात्रा निकालकर संदेश दिया कि कला एवं कलाकार हर स्थिति से लड़ने को हमेशा तैयार है साथ ही उन्होने कोरोना से सुरक्षा, नो मास्क- नो एंट्री, दो गज की दूर मास्क है जरूरी आदि के बोर्ड भी प्रदर्शित किए। यहां पर 60 शिल्पियों ने अपने शिल्पों की प्रदर्शनी एवं बिक्री भी प्रारंभ कर दी है। कार्यक्रम सभी के लिए निशुल्क है परन्तु कोविड-19 की गाइड लाइन की अनुपालना अनुसार मास्क नहीं होने पर प्रवेश वर्जित है। हिन्दुस्थान समाचार/सुनीता कौशल