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राजस्थान

सरकार ऑक्सीजन के नाम पर राजनीति छोडक़र महामारी से मुकाबला करें : राठौड़

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जयपुर, 29 अप्रैल (हि.स.)। प्रतिपक्ष के उपनेता राजेंद्र सिंह राठौड़ ने कहा कि कोरोना महामारी के बीच राज्य की कांग्रेस सरकार को ऑक्सीजन के नाम पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। ऐसे वक्त में सरकार को ऑक्सीजन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए। उन्होंने कहा कि हम सबको मिलकर इस महामारी से मुकाबला करना चाहिए, सरकार को विपक्ष से जो भी सहायता की आवश्यकता है उसके लिए हम हमेशा तैयार हैं। प्रतिपक्ष के उपनेता राठौड़ गुरुवार को वर्चुअल माध्यम से पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राजस्थान में कोरोना का कम्युनिटी स्प्रेड हो गया है, 28 दिन में 2 लाख 30 हजार नए संक्रमित मरीज आए हैं जिसमें 88 हजार के लगभग ग्रामीण क्षेत्रों मे आए हैं। जांच में हर तीसरा व्यक्ति पॉजिटिव आ रहा है। राजस्थान में पॉजिटिव केस की संख्या में वृद्धि 37 परसेंट के करीब हुई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने दावा किया था कि हमारे पास 22 हजार ऑक्सीजन युक्त बेड हैं और 1 लाख 13 हजार आइसोलेशन बेड हैं। सरकार ने फिजिकल जांच नहीं कराई कि इतनी संख्या में बेड हैं या नहीं। जयपुर समेत राज्य के अन्य जिला चिकित्सालयों की स्थिति बद से बदतर हो रही है। सरकार ने निजी चिकित्सालयों में कोई हेल्थ प्रोटोकॉल तय नहीं किया, नोडल ऑफिसर तय नहीं किए तथा मरीजों को चुकाने वाली राशि की दरें तय कर अपना कर्तव्य पूरा कर लिया। राठौड़ ने कहा कि निजी अस्पतालों के ऑक्सीजन कोटा में 30 से 40 प्रतिशत की कमी कर दी गई है, जिससे वहां पहले से भर्ती मरीजों के जीवन पर संकट आ गया है। रेमडेसिविर इंजेक्शन निजी चिकित्सालय में उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं। राठौड़ ने कहा कि भामाशाह बीमा योजना एवं महात्मा गांधी आयुष्मान योजना में कोरोना से पीडित होने पर जो अस्पताल इन पैनल में आते हैं सरकार को पीडित मरीजों को तुरंत मुफ्त इलाज का प्रबंध करना चाहिए। ऑक्सीमीटर, निमोलाइजर और थर्मामीटर कोरोना में आवश्यक हैं, कोरोना इलाज से संबंधित दवाइयां या तो मार्केट से गायब है या इनके दाम 4 से 6 गुना बढ़ चुके हैं। इंजेक्शन तथा ऑक्सीजन सिलेंडर की कालाबाजारी हो रही है । राठौड़ ने आरटीपीसीआर टेस्ट के लिए लैब्स पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि लैब से रिपोर्ट पांच दिन बाद आ रही है। ऐसे में सरकार को इन लैब का फिजिकल वेरिफिकेशन करवाना चाहिए। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए की टेस्ट रिपोर्ट 48 घंटे में आ जाए। उन्होंने कहा कि अभी सरकार ने 1 लाख 75 हजार रेमडेसिविर इंजेक्शन खरीदने का आदेश दिया। सरकार से सवाल है कि यह आदेश अप्रैल के दूसरे सप्ताह में क्यों दिया। जब सरकार ने 21 मार्च को नाईट कफ्र्यू लगाने का आदेश दिया तो उस समय इंजेक्शन खरीदने का आदेश क्यों नहीं दिया। राठौड़ ने कहा कि डीएमएफटी का फंड 4500 करोड़ था उसमें 2000 करोड़ अभी भी सरकार के पास शेष है। इससे सरकार तुरंत 20 हजार ऑक्सीजन कंसंट्रेटर खरीदें जिससे ऑक्सीजन की कमी की पूर्ति की जा सके। राठौड़ ने प्रदेश में आईएएस की इतनी बड़ी फौज पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि कोरोना की आपदा के बीच हेल्पलाइन के नाम पर जो व्यवस्था कर रखी है वहां फोन उठता नहीं है। हिन्दुस्थान समाचार/रोहित/संदीप