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राजस्थान

नीति आयोग की बैठक में गहलोत ने प्रधानमंत्री को याद दिलाया पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना का वादा

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जयपुर, 20 फरवरी (हि.स.)। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को उनके जयपुर व अजमेर दौरे के दौरान किया गया वादा याद दिलाया। मुख्यमंत्री गहलोत ने प्रधानमंत्री से पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ईआरसीपी) को राष्ट्रीय परियोजना घोषित करने की गुजारिश करते हुए कहा कि ईआरसीपी को नेशनल प्रोजेक्ट के रूप में घोषित करने से प्रदेश के 13 जिलों में गांवों से दूर ढाणियों में आबाद एक बड़ी आबादी को पीने के लिए पानी की उपलब्धता हो सकेगी। मुख्यमंत्री गहलोत शनिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई नीति आयोग की शासी परिषद की छठीं बैठक को वीसी के माध्यम से संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि नीति आयोग की ओर से बैठक के लिए रखा गया एजेंडा प्रासंगिक हैं। कोविड के बाद अब रोजगार के सृजन और स्वास्थ्य सेवाओं पर ज्यादा ध्यान देने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश का 10 प्रतिशत भू-भाग राजस्थान में है। छत्तीसगढ़ बनने के बाद राजस्थान सबसे बड़ा प्रदेश बन गया है। यहां पानी एक प्रतिशत ही है। सदियों से राजस्थान रेगिस्तान और मरुस्थल का भाग रहा है और यहां के लोग पानी को लेकर तरसते रहे हैं। कई इलाकों में पीने के लिए खारा पानी भी है, पानी में नाइट्रेट भी है और पानी को लेकर हालत नाजुक भी है। पिछली गवर्नमेंट ने एक स्कीम बनाई थी। पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ईआरसीपी)। इसके लिए हमारी मांग रही है कि इसे राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जब राजस्थान में जयपुर व अजमेर आए थे, तब उन्होंने इसे राष्ट्रीय परियोजना बनाने का वादा किया था। वर्तमान में 16 परियोजनाएं असम, आंध्रप्रदेश, हिमाचल, उत्तराखंड, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, पश्चिम बंगाल में है। ऐसे में अगर 16 की जगह 17 बन जाएंगी तो ये योजना प्राथमिकता पर पूरी हो पाएगी। इस परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा मिलने पर 13 जिले झालावाड़, बारां, कोटा, बूंदी, सवाई माधोपुर, अजमेर, टोंक, जयपुर करौली, अलवर, भरतपुर, दौसा, धौलपुर लाभान्वित हो सकेंगे। इसमें सिंचाई भी होगी और पीने का पानी भी मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि रेगिस्तान में अन्य राज्यों के मुकाबले कॉस्ट ऑफ डिलीवरी बहुत ज्यादा है। पंजाब-यूपी की तरह एक गांव खत्म होने के बाद दूसरा गांव नहीं आता है। यहां तो एक गांव खत्म हुआ और 10-15 किलोमीटर बाद दूसरा गांव आता है। आजकल तो लोग गांव में कम बसते हैं, ढाणियों में जाकर बस गए हैं। ढाणियों तक में पानी पहुंचाना बहुत बड़ा काम है। इसके लिए केन्द्र ने जल जीवन मिशन के रूप में एक बहुत ही एम्बीशियस प्रोजेक्ट देश को दिया है। 2024 तक इसे पूरा करना है। ये मिशन अपने आप में राजस्थान के लिए महत्वपूर्ण है। ये तभी होगा जब पानी का सोर्सेस आएगा। ये सोर्सेस पूर्वी नहर परियोजना, ट्यूबवैल और बांधों से आएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि खनिज सम्पदा राजस्थान में बहुत ज्यादा है। पोटाश पूरे देश में सिर्फ राजस्थान में ही मिलेगा। इसलिए भारत सरकार की मिनरल एक्सप्लोरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड और जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया मिलकर खनिज सम्पदा का सांटिफिक एक्सप्लोरेशन कैसे कर सकें, इसके लिए प्रयास करें तो राजस्थान समेत पूरे देश को उसका लाभ मिल सकेगा। हिन्दुस्थान समाचार/रोहित/ ईश्वर