सोलह घंटे बाद देसी जुगाड़ से सुरक्षित बोरवैल से बाहर निकाल लिया गया 4 साल का मासूम अनिल

सोलह घंटे बाद देसी जुगाड़ से सुरक्षित बोरवैल से बाहर निकाल लिया गया 4 साल का मासूम अनिल
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जालोर, 07 मई (हि.स.)। जालोर जिले के लाछड़ी गांव में बोरवैल में गिरे चार वर्षीय बालक अनिल को सोलह घंटे बाद गुरूवार देर रात सकुशल बाहर निकाल लिया गया। बालक को बोरवैल से निकालने के आधुनिक तकनीक से काम नहीं बनने पर गांव के ठेठ देसी आदमी माधाराम उर्फ जुगाड़ी बोस की तकनीक काम आई और उन्होंने महज पच्चीस मिनट में अनिल को सकुशल बाहर निकाल लिया। बच्चे को बाहर देखते ही उसकी माता-पिता की आंखों से आंसू बह निकले। बोरवेल में यह बच्चा गुरुवार सुबह गिर गया था और 90 फीट की गहराई पर जाकर फंस गया था। घटना लाछड़ी गांव में नगाराम देवासी के खेत की है। जहां नया बोरवैल खुदवाया गया था। कच्चे बोरवेल को ऊपर से ढंका हुआ था। गुरुवार सुबह करीब सवा दस बजे नगाराम का 4 साल का बेटा अनिल खेलते हुए बोरवैल में झांकने लगा। इस दौरान संतुलन बिगड़ने पर वह अंदर जा गिरा। निकट ही खड़ा एक परिजन उसे अंदर गिरते देख जोर से चिल्लाया। तब तक काफी देर हो चुकी थी। बच्चा ऊपर से नजर आ रहा था। इसके बाद उसे बचाने के लिए प्रयास शुरू किए गए। बच्चे की स्थिति देखने के लिए बोरवैल में कैमरा डाला गया। रस्सी से पानी की बोतल पहुंचाई, जिसके बाद बच्चे ने पानी पिया। घटना के 8 घंटे बाद एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। गांव के लोगों ने पहले देसी जुगाड़ से बच्चे को निकालने की कोशिश की। उन्होंने 10 फीट ऊपर तक बच्चे को खींचा भी, लेकिन वह छूट गया और वापस उसी स्थान पर पहुंच गया। देर शाम जिला कलक्टर नम्रता वृष्णि, पुलिस अधीक्षक श्यामसिंह भी मौके पर पहुंचे तथा रेस्क्यू आॅपरेशन की जानकारी ली। अजमेर और गांधीनगर से आई एसडीआरएफ की टीम को रेस्क्यू ऑपरेशन में कामयाबी नहीं मिली तो बच्चे के परिजनों और लोगों ने जिला कलेक्टर से निवेदन किया कि स्थानीय व्यक्ति माधाराम की मदद ली जाए। इस पर रात करीब 1.55 बजे रेस्क्यू शुरू किया और 2 बजकर 20 मिनट पर 25 मिनट के अंतराल से बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। जिला कलक्टर नम्रता वृष्णि ने बताया कि बोरवेल में नब्बे फीट की गहराई पर फंसे बालक अनिल को निकालना आसान नहीं था। बड़ोदरा व गांधीधाम के अलावा अजमेर से आई एनडीआरएफ की टीमों के प्रयास विफल होने के बाद स्थानीय व्यक्ति माधाराम की मदद ली गई और उसके बनाए देसी जुगाड़ ने करिश्मा कर दिया। महज पच्चीस मिनट में ही अनिल बोरवैल से बाहर आ गया। माधाराम सुथार क्षेत्र में जुगाड़ी बोस के नाम से प्रसिद्ध है। जालोर जिले के बागौड़ा क्षेत्र निवासी माधाराम को पूरे क्षेत्र के लोग खेती-किसानी के मामलों में अटकने पर याद करते है। माधाराम भी किसी को निराश नहीं करते। लोगों के बुलाते ही मौके पर पहुंच जाते है। माधाराम ने कई बार इस प्रकार के रेस्क्यू किए हैं। वो राज्यस्तर व जिला स्तर पर सम्मानित भी हो चुके है। इनका मुख्य कार्य बोरवेल से मोटर निकालने का है। उसके साथ-साथ जब भी आवश्यकता पड़ी इन्होंने अपने हुनर से कई लोगो की जान बचाने का कार्य किया है। माधाराम को वन एवं पर्यावरण मंत्री सुखराम बिश्नोई ने फोन पर बधाई दी। उन्होंने मासूम की जान बचाने पर सम्मानित करने का भी आश्वासन दिया। ऐसे बनाया जुगाड़ बालक को बाहर निकालने के लिए जलापूर्ति के लिए काम आने वाले पीवीसी के नब्बे-नब्बे फीट के तीन पाइप मंगाए। उसने तीनों पाइप के आगे एक टी को जोड़ा। इनके बीच में एक रस्सी बांध दी गई। साथ ही कैमरे को भी इससे जोड़ा गया। रात 1.55 बजे जुगाड़ी बोस ने मोर्चा संभाला। नब्बे फीट तक इस जुगाड़ को पहुंचाने के बाद टी को बालक के सिर से होते हुए पेट तक पहुंचाया गया। सीने तक पहुंचते ही रस्सी को खींचा गया। इससे तीनों पाइप के बीच में बच्चा फंस गया। इसके बाद रस्सी को खींचने का काम शुरू हुआ। रस्सी के साथ तीनों पाइप भी बाहर आते रहे। थोड़ी देर में बच्चा माधाराम के हाथ में था। इस रेस्क्यू ऑपरेशन में महज पच्चीस मिनट का समय लगा। निष्फल होते गए सारे प्रयास पहला प्रयास माधाराम सुथार ने जुगाड़ से किया। कुछ फीट तक बच्चे को ऊपर लाने में कामयाब रहा, लेकिन वहां मौजूद लोग उत्साह से चिल्लाने लगे और रस्सी ढीली पड़ गई। इसके साथ ही बच्चा अपनी पुरानी जगह पर जाकर अटक गया। दूसरा प्रयास गांधीनगर से आई एनडीआरएफ की टीम ने किया, लेकिन विफल रही। तीसरा प्रयास जोधपुर के मथानियां की जुगाड़ टीम ने किया, लेकिन वे भी विफल रहे। चौथा प्रयास एनडीआरएफ की अजमेर व गुजरात की टीम ने एक बार फिर मोर्चा संभाला। वे बच्चे के हाथ तक पहुंच भी गई, लेकिन बाहर नहीं निकाल पाए। सोलह घंटे तक बोरवेल में फंसे बालक को जिंदा रखने के लिए ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी ओमप्रकाश सुथार व डॉ दीपाराम चौधरी ने ऑक्सीजन की कमी नही आने दी। यहीं कारण रहा कि बालक अनिल नब्बे फीट की गहराई पर फंसे रहने के बावजूद सोलह घंटे तक जिंदा रह सका। हिन्दुस्थान समाचार/रोहित / ईश्वर