विधानसभा में शिक्षा विभाग के सवाल का जवाब देकर मुकर गए शिक्षा मंत्री

विधानसभा में शिक्षा विभाग के सवाल का जवाब देकर मुकर गए शिक्षा मंत्री
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जयपुर, 14 अप्रैल (हि. स.)। शिक्षा मंत्री गोविन्द सिंह डोटासरा की ओर से राज्य विधानसभा में परीक्षा परिणाम में शिक्षकों के योगदान से जुड़े एक सवाल के जवाब में बुधवार को राज्य के शिक्षा जगत में भूचाल आ गया। जवाब में परीक्षा परिणामों में शिक्षकों का योगदान नहीं होने की स्वीकारोक्ति के बाद प्रदेशभर के शिक्षाविदों में आक्रोश गहरा गया। शिक्षक कार्मिकों के निशाने पर आए शिक्षा मंत्री डोटासरा ने हाथों-हाथ जवाब की स्वीकारोक्ति का खंडन किया। उन्होंने ट्वीट कर सफाई दी कि शिक्षकों का योगदान केवल बेहतर परीक्षा परिणाम में ही नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में भी होता है, इसमें कोई संदेह नहीं है। इस सफाई के बावजूद उनकी स्वीकारोक्ति को लेकर पैदा हुआ आक्रोश कम नहीं हुआ। विधायक फूलसिंह मीणा की ओर से विधानसभा में शिक्षा विभाग से पूछा गया था कि सरकार पूरक परिणाम में वृद्धि में संबंधित संस्था प्रधान व विषय अध्यापकों का योगदान मानती है? इसके जवाब में पांच मार्च 2021 को जवाब दिया गया है कि, 'जी नहीं। परीक्षा परिणाम उन्नयन एवं नामांकन वृद्धि के लिए निदेशक माध्यमिक शिक्षा बीकानेर के सात मई 2015 द्वारा जारी दिशा-निर्देशों की पालना सुनिश्चित करने से ही उक्त परिवर्तन संभव हुआ है।' यह जानकारी सार्वजनिक होने के बाद शिक्षा विभाग के कार्मिकों में आक्रोश गहरा गया। कार्मिकों में आक्रोश बढऩे के बाद शिक्षा मंत्री डोटासरा ने ट्वीट कर सफाई दी। उन्होंने लिखा कि तथ्यों को तोड़-मरोडक़र लिखा जा रहा है, जबकि वे इस तथ्य से सहमत नहीं है। उन्होंने सफाई दी कि शिक्षकों का योगदान केवल बेहतर परीक्षा परिणाम में ही नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में भी होता है, इसमें कोई संदेह नहीं है। गौरतलब है कि इससे पहले भी स्कूलों में वार्षिकोत्सव के मुद्दे पर शिक्षा मंत्री डोटासरा विधानसभा अध्यक्ष की फटकार खा चुके हैं। विधानसभा में स्कूलों में वार्षिकोत्सव के मुद्दे पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी का उलाहना सुनने के बाद शिक्षा मंत्री डोटासरा ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक का बचाव करते हुए उनके नाम से जारी आदेश को खुद के स्तर पर किया गया निर्णय बताया था। हिन्दुस्थान समाचार/रोहित/संदप