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राजस्थान

जिला उपभोक्ता संरक्षण आयोग द्वितीय का निर्णय: सम्पत्ति दस्तावेज गुम करने पर बैंक पर एक लाख रुपए हर्जाना

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जोधपुर, 28 फरवरी (हि.स.)। जिला उपभोक्ता संरक्षण आयोग द्वितीय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में ऋणी के सम्पत्ति दस्तावेज गुम कर देने के मामले में मरूधरा ग्रामीण बैंक पर एक लाख रुपये का हर्जाना लगाया है। मामले के अनुसार पूंजला निवासी दिनेश गहलोत ने जिला उपभोक्ता संरक्षण आयोग द्वितीय के अध्यक्ष डॉ श्याम सुन्दर लाटा व सदस्य डॉ अनुराधा व्यास, आनंद सिंह सोलंकी के समक्ष परिवाद प्रस्तुत कर बताया कि उसने मरूधरा ग्रामीण बैंक, मगरा पूंजला, जोधपुर शाखा से ऋण लेते समय अपनी दुकान व गोदाम के असल पट्टे बैंक में जमा करवाए थे। दिसम्बर, 2013 में सम्पूर्ण ऋण जमा करवा देने के बावजूद बैंक द्वारा उक्त पट्टे गुम हो जाना बतलाकर वापस नहीं लौटाए जा रहे हैं। बैंक द्वारा जवाब प्रस्तुत कर आयोग को बताया गया कि तत्कालीन शाखा प्रबंधक की असामयिक मृत्यु होने से अन्य अधिकारी द्वारा चार्ज नहीं लिए जाने के कारण उक्त पट्टे बैंक में नहीं मिल रहे हैं, जो मिलते ही परिवादी को वापस लौटा दिए जायेंगे। आयोग ने अपने निर्णय में कहा कि आठ वर्ष की अवधि के बावजूद उक्त दस्तावेज वापस नहीं लौटाए जाने से बैंक कर्मचारियों की लापरवाही से परिवादी को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। असल दस्तावेज गुम हो जाने से सम्पति के बाजार मूल्य में गिरावट आने के अलावा इनके बिना बैंक या किसी वित्तीय संस्थान द्वारा पुन: ऋण नहीं दिया जा सकता है। मूल पट्टे किसी अन्य व्यक्ति को प्राप्त हो जाने पर इनका दुरुपयोग किये जाने की संभावना भी सदैव बनी रहेगी। बैंक की सेवाओं में माना कमी आयोग ने इस प्रकार बैंक की सेवाओं में कमी मानते हुए तीन माह की अवधि में परिवादी को मूल पट्टा दस्तावेज लौटाने का आदेश दिया है। तीन माह में असल पट्टे नहीं लौटाने पर बैंक द्वारा परिवादी को एक लाख रुपए की क्षतिपूर्ति व पचीस हजार रुपए मानसिक वेदना के निमित्त राशि अदा की जाएगी। आयोग ने यह भी आदेश दिया है कि उक्त पट्टे गुम हो जाने की सूचना बैंक द्वारा अपने खर्चे पर समाचार पत्र में प्रकाशित करवाई जावे तथा पुलिस में रिपोर्ट भी दर्ज करवाई जावे। पट्टे गुम हो जाने के लिए बैंक को जांच कर दोषी कर्मचारी से उक्त राशि वसूल करने की छूट दी गई है। हिन्दुस्थान समाचार/सतीश/संदीप