मुख्यमंत्री ने नकारे राजस्थान में वैक्सीन की बर्बादी के आरोप, आंकड़े बताकर, कहा-नकारात्मक राजनीति न करें भाजपा

मुख्यमंत्री ने नकारे राजस्थान में वैक्सीन की बर्बादी के आरोप, आंकड़े बताकर, कहा-नकारात्मक राजनीति न करें भाजपा
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जयपुर, 28 मई (हि.स.)। कोरोना से बचाव के लिए वैक्सीन की बर्बादी को लेकर राजस्थान में सियासत गरमा गई है। भाजपा राज्य सरकार पर वैक्सीन की बर्बादी का आरोप लगा रही है। इस पर सीएम अशोक गहलोत ने शुक्रवार को आंकड़ों से जवाब देते हुए भाजपा के नेताओं से महामारी के समय में नकारात्मक राजनीति नहीं करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कोविड वैक्सीन की 11.5 लाख डोज़ बर्बाद होने की खबर झूठी है। भाजपा ऐसे झूठे आरोप लगाकर 14 महीने से मेहनत कर रहे हमारे कोरोना वॉरियर्स का मनोबल तोडऩे का काम कर रही है जो निंदनीय है। मैं विपक्ष के नेताओं से अपील करूंगा कि महामारी के समय ऐसी नकारात्मक राजनीति ना करें। गहलोत ने कहा कि राजस्थान में कोविड वैक्सीन की 11.5 लाख डोज़ बर्बाद होने की खबर झूठी है। कोविन सॉफ्टवेयर पर दर्ज आंकड़ों के मुताबिक 26 मई तक प्रदेश में 1 करोड़ 63 लाख 67 हजार 230 लोगों को टीका लगाया जा चुका है। इनमें से 3.38 लाख डोज़ खराब हुई हैं। यह सिर्फ 2 प्रतिशत है, जो वैक्सीन खराबी की राष्ट्रीय औसत 6 प्रतिशत एवं भारत सरकार द्वारा वैक्सीन खराबी की अनुमत सीमा 10 प्रतिशत से बेहद कम है। उन्होंने कहा कि वैक्सीन की ट्रेकिंग के लिए बने सॉफ्टवेयर वीआईएन पर वैक्सीनेशन ड्राइव की शुरुआत में तकनीकी दिक्कतों के कारण कई वैक्सीनेशन केन्द्रों पर 2.95 लाख डोज की एंट्री दो बार हो गई। इस कारण वीआईएन सॉफ्टवेयर पर कुल वैक्सीन की संख्या 1 करोड़ 70 लाख 01 हजार 220 दर्ज बता दी गई। यह आंकड़ा सही नहीं है। राजस्थान में 3.38 लाख डोज़ ही खराब हुई है। सीएम गहलोत ने कहा कि पूर्व में भारत सरकार के कोविन सॉफ्टवेयर में लाभार्थी का नाम केन्द्र सरकार द्वारा स्वत: दर्ज होने के कारण उनके अनुपस्थित होने पर किसी अन्य लाभार्थी को वैक्सीन नहीं लग पाती थी। 10 के गुणांक में लोग वैक्सीन लगवाने नहीं आते तो अन्य लाभार्थी की ऑफलाइन एंट्री नहीं हो सकती थी जिससे वैक्सीन खराब होती थी। इसी कारण हमने पत्र लिखकर केन्द्र सरकार से ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन की मांग की, जिससे वैक्सीन खराब ना हो। इसी प्रकार छत्तीसगढ़ में 30.2 प्रतिशत एवं झारखंड में 37.3 प्रतिशत वैक्सीन डोज़ खराब होने का आरोप लगाया गया, जबकि दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों एवं स्वास्थ्य मंत्रियों ने छत्तीसगढ़ में 0.95 प्रतिशत एवं झारखंड में 4.65 प्रतिशत वैक्सीन डोज़ खराब होने के आंकड़े बताए हैं। कहां तो केन्द्र सरकार 37 प्रतिशत एवं 30 प्रतिशत के आंकड़े देती है और कहां असल आंकड़ा सिर्फ 4.65 प्रतिशत एवं 0.95 प्रतिशत का है। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि महामारी के समय में जान-बूझकर जनता को गुमराह करने का प्रयास किया जा रहा है। 21 मई को हुई वीसी में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने कहा था कि केंद्र सरकार के पोर्टल में तकनीकी दिक्कत है, जो वैक्सीन बर्बादी के प्रतिशत को बढ़ा देती है। उन्होंने आश्वासन दिया था कि केन्द्र सही आंकड़े पेश करने के लिए राज्यों से बात करेगा एवं तब आंकड़े जारी करेगा। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने स्वीकार किया था कि पोर्टल की तकनीकी दिक्कत वैक्सीन के खराब होने का प्रतिशत बढ़ा देती है। मुख्यमंत्री का कहना है कि हम सभी को साथ लेकर कोविड प्रबंधन का कार्य कर रहे हैं लेकिन भारतीय जनता पार्टी ऐसे झूठे आरोप लगाकर 14 महीने से दिन रात मेहनत कर रहे कोरोना वॉरियर्स का मनोबल कम करने का प्रयास कर रही है। मीडिया के साथी भी राज्य सरकार का पक्ष जाने बिना रिपोर्ट लिख देते हैं जिससे आमजन में भ्रम की स्थिति पैदा होती है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि महामारी के समय में भाजपा द्वारा की जा रही झूठ की इस राजनीति को पूरा देश देख रहा है। गलत नीतियों के कारण ये वैक्सीन उपलब्ध करवाने में नाकामयाब रहे हैं, जिसका ठीकरा ये राज्यों पर फोडऩा चाहते हैं। मैं अपील करूंगा राजस्थान के विपक्षी नेताओं से कि तमाम तरह के विवाद पैदा करने की बजाय वो प्रदेश के हित को याद रखकर केन्द्र पर दबाव बनाएं, जिससे राजस्थान को अधिक वैक्सीन मिल सके। साथ ही, केन्द्र सरकार पर निशुल्क यूनिवर्सल वैक्सीनेशन के लिए भी दबाव बनाएं। राजस्थान वैक्सीनेशन में देशभर में अव्वल है और आगे भी सर्वश्रेष्ठ कार्य करता रहेगा। हिन्दुस्थान समाचार/रोहित/संदीप

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