महापौर को हटाने के विरोध में भाजपा का राज्यपाल को ज्ञापन

महापौर को हटाने के विरोध में भाजपा का राज्यपाल को ज्ञापन
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जयपुर, 08 जून (हि.स.)। भारतीय जनता पार्टी प्रतिनिधि मंडल ने मंगलवार को भाजपा की महापौर डॉ. सौम्या गुर्जर व निर्वाचित भाजपा पार्षद अजयसिंह चौहान, शंकर शर्मा व पारस जैन को असंवैधानिक रूप से आदेश के विरोध में राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमण्डल में डॉ. सतीश पूनियां, नेता प्रतिपक्ष गुलाबचन्द कटारिया, उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़, पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अरूण चतुर्वेदी, जयपुर शहर सांसद रामचरण बोहरा, करौली-धौलपुर सांसद मनोज राजौरिया, जयपुर शहर अध्यक्ष राघव शर्मा, विधायक नरपत सिंह राजवी, महापौर डॉ. सौम्या गुर्जर, उपमहापौर पुनीत कर्णावट मौजूद थे। इससे पहले भाजपा पदाधिकारियों ने प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां के नेतृत्व में भाजपा मुख्यालय पर कांग्रेस के अलोकतांत्रिक फैसले के विरोध में धरना दिया गया। राज्यपाल को सौंपे ज्ञापन में कहा गया है कि जयपुर महानगर में नगर पालिका अधिनियम 2009 के अन्तर्गत अक्टूबर 2020 में नगर निगम गे्रटर जयपुर महानगर के पार्षदगणों का चुनाव सम्पन्न हुआ था, जिसमें भाजपा डॉ. सौम्या गुर्जर महापौर चुनी गई। नगर निगम जयपुर ग्रेटर में भाजपा की महापौर व बोर्ड बनने के बाद से ही राज्य की कांग्रेस सरकार में नगर निगम जयपुर गे्रटर की महापौर व बोर्ड के कार्यों में बाधा पहुंचाना प्रारम्भ कर दिया, बोर्ड के चैयरमेनों के निर्वाचन के मामले में भी राज्य सरकार ने अड़चन की, तब राजस्थान उच्च न्यायालय के आदेश के बाद ही विभिन्न समितियों के चैयरमेन अपना पद ग्रहण कर पाये। कांग्रेस सरकार बोर्ड को कानून की गलत व्याख्या कर अस्थिर करने का कर रही है। वर्तमान में जयपुर नगर निगम गे्रटर के क्षेत्र में सफाई व्यवस्था बी.वी.जी. कम्पनी को दी है, लेकिन कंपनी सफाई कार्य ठीक से नहीं कर रही है। कंपनी ने बीच में हड़ताल कर दी थी, जिससे शहर में सफाई व्यवस्था चरमरा गई तथा गन्दगी के ढेर होने लगे। जनता के भय व शिकायत को देखते हुए महापौर डॉ. सौम्या गुर्जर ने 04 जून 2020 को अपने कक्ष में सफाई व्यवस्था के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने के लिए एक बैठक रखी, जिसमें नगर निगम आयुक्त यज्ञमित्र सिंह व अन्य अधिकारियों को बुलाया। राजस्थान नगर पालिका अधिनियम 2009 के अनुसार नगर निगम के सभी अधिकारी महापौर के अधीन होते है। यज्ञमित्र सिंह आयुक्त ने महापौर द्वारा बुलाई गई अहम बैठक को बीच में ही छोड़कर बगैर महापौर से अनुमति लिये उठकर जाने पर महापौर व उपस्थित अन्य पार्षदगणों द्वारा आपत्ति किये जाने पर आयुक्त यज्ञमित्र सिंह आवेश में आ गये तथा महापौर को धमकी दी की कम्पनी के बिलों का भुगतान पहले करना पड़ेगा, अन्यथा मैं जा रहा हूं। महापौर का कथन था कि कम्पनी के बिलों की जांच करवाकर ही भुगतान किया जायेगा। लेकिन शहर में सफाई की वैकल्पिक व्यवस्था अत्यावश्यक है, लेकिन आयुक्त अपनी बात पर अडे रहे तथा महापौर के निर्देश को मानने से स्पष्ट इंकार कर बैठक को बिना महापौर की अनुमति के छोड़कर चले गये। आयुक्त ने सोची-समझी साजिश के तहत राज्य सरकार के इशारे पर पुलिस में एक झूठी रिपोर्ट दर्ज करवाई तथा स्वायत्त शासन विभाग में झूठी शिकायत की, जिस पर राज्य सरकार ने पूर्व से निर्धारित साजिश के तहत कनिष्ठ अधिकारी रेणु खण्डेलवाल को घटना की जांच सौंप दी। खण्डेलवाल ने महापौर व अन्य पार्षदगणों को जांच में सुनवाई का अवसर ही नहीं दिया। इसके बाद से विवाद बढ़ता गया। हिन्दुस्थान समाचार/ ईश्वर/संदीप