गहलोत सरकार के अलोकतांत्रिक फैसले के खिलाफ भाजपा का प्रदेशभर में विरोध- प्रदर्शन

गहलोत सरकार के अलोकतांत्रिक फैसले के खिलाफ भाजपा का प्रदेशभर में विरोध- प्रदर्शन
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जयपुर, 08 जून (हि.स.)। राज्य की गहलोत सरकार द्वारा अलोकतांत्रिक तरीके से जयपुर ग्रेटर नगर निगम की महापौर व तीन अन्य पार्षदों को निलम्बित करने, बिगड़ी हुई कानून व्यवस्था, लम्बित भर्तियों, सम्पूर्ण किसान कर्जमाफी सहित विभिन्न जनहित के मुद्दों को लेकर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां के आहृान पर जयपुर से लेकर पूरे प्रदेशभर के सभी मण्डलों पर कोविड गाइडलाइन की पालना करते हुए काली पट्टी बांधकर धरने-प्रदर्शन किये गये और अशोक गहलोत सरकार की तानाशाही के खिलाफ नारेबाजी की गई। डॉ. पूनियां के नेतृत्व एवं आहृान पर भाजपा प्रदेश कार्यालय परिसर के बाहर धरना-प्रदर्शन किया गया, जिसमें प्रदेश संगठन महामंत्री चन्द्रशेखर, नेता प्रतिपक्ष गुलाबचन्द कटारिया, उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़, पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अरूण चतुर्वेदी, जयपुर शहर सांसद रामचरण बोहरा, करौली-धौलपुर सांसद मनोज राजौरिया, राज्यसभा सांसद रामकुमार, विधायक एवं पूर्व मंत्री वासुदेव देवनानी, नरपत सिंह राजवी, प्रदेश उपाध्यक्ष सरदार अजयपाल सिंह, मुकेश दाधीच, माधोराम चौधरी, प्रदेश मंत्री श्रवण सिंह बगड़ी, बिजेन्द्र पूनिया, अशोक सैनी, प्रदेश मीडिया प्रभारी विमल कटियार, महापौर डॉ. सौम्या गुर्जर, उपमहापौर पुनीत कर्णावट, अजमेर नगर निगम उपमहापौर नीरज जैन, महिला मोर्चा प्रदेशाध्यक्ष अल्का मूंदड़ा, युवा मोर्चा प्रदेशाध्यक्ष हिमांशु शर्मा, अल्पसंख्यक मोर्चा प्रदेशाध्यक्ष एम. सादिक खान, अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एच. खान, सोशल मीडिया प्रदेश प्रभारी हिरेन्द्र कौशिक सहित पार्टी के प्रमुख पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं पार्षद मौजूद रहे। डॉ. पूनियां ने कहा कि प्रदेशभर के एक हजार से अधिक मण्डलों पर कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए गहलोत सरकार की तानाशाही व असंवैधानिक फैसले के खिलाफ धरने- प्रदर्शन किये गये। भविष्य में भी जनहित के मुद्दों को लेकर जब-जब जरूरत पड़ेगी भाजपा सड़क से लेकर सदन तक लड़ाई लड़ने को तैयार है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत बात-बात पर नैतिकता और लोकतंत्र की दुहाई देते हैं, लेकिन ‘‘हाथी के दांत खाने के और-दिखाने के और हैं’’, उनकी कथनी और करनी में इतना फर्क है कि जयपुर ग्रेटर नगर निगम की महापौर व तीन अन्य पार्षदों को निलम्बित किया जाना ये अपने आप में प्रतिशोध एवं विद्वेष को साबित करता है। नगरपालिका अधिनियम की धारा 39 का दुरुपयोग यह प्रदेश में पहली बार हुआ है। यह साफ तौर पर कांग्रेस की खीज और बौखलाहट है। जयपुर शहर में भाजपा को बड़ा जनादेश मिला, कांग्रेस को मुंह की खानी पड़ी, उसी समय से मुख्यमंत्री के मन में ये बौखलाहट है। अफसर व जनप्रतिनिधियों के सामान्य वाद-विवाद को उन्होंने आपराधिक मुकदमों में तब्दील किया, ये दुर्भाग्यपूर्ण, शर्मनाक एवं अलोकतांत्रिक है। हिन्दुस्थान समाचार/ ईश्वर/संदीप