सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या पर होगा भूले बिसरे दिवंगतों का श्राद्ध
सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या पर होगा भूले बिसरे दिवंगतों का श्राद्ध
राजस्थान

सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या पर होगा भूले बिसरे दिवंगतों का श्राद्ध

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झुंझुनू, 15 सितंबर(हि.स.)। गुरुवार 17 सितंबर को पित्र पक्ष की अंतिम तिथि सर्व पितृमोक्ष अमावस्या है। इसके साथ ही श्राद्ध पक्ष खत्म हो जाएंगे। पूरे पितृपक्ष में यदि कोई व्यक्ति अपने किसी पूर्वज का श्राद्ध करना भूल गया है या उसे मृत व्यक्ति की पुण्यतिथि मालूम नहीं है तो सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या पर श्राद्ध किया जा सकता है। आगे अधिक मास होने के कारण एक महीने बाद 17 अक्टूबर को मातामह का श्राद्ध निकलेगा। दिवंगत परिजनों की स्मृति में तर्पण और श्राद्ध कर्म की तिथि अनुसार करने की परंपरा है। लेकिन कई बार तिथियों तिथियों का पता नहीं होने या दिवंगत के परिवार में संतान नहीं होने सहित अन्य कई समस्याएं होती है। पंडित रोहित पुजारी ने बताया कि कुंडली में पितृ दोष, गुरु चांडाल योग, चंद्र या सूर्य ग्रहण योग हो तो इस दिन विशेष उपाय किए जा सकते हैं। अमावस्या पर सभी ज्ञात अज्ञात पितरों का पिंडदान करना श्रेष्ठ माना जाता हैं। मान्यता है कि पितृपक्ष में सभी पितर देवता धरती पर अपने कुल परिवारों में आकर धूप, ध्यान, तर्पण आदि ग्रहण करते हैं। अमावस्या पर यह पितृ लोक में चले जाते हैं। इसके एक दिन बाद मातामह निकाला जाता है। उन्होंने बताया कि संतान न होने की स्थिति में मातामह श्राद्ध के दिन अर्पण कर सकता है। इस बार अधिक मास के चलते एक महीने बाद 17 अक्टूबर को मातामह का श्राद्ध निकलेगा। पंडित रोहित पुजारी ने बताया कि श्राद्ध पक्ष में पितरों की संतुष्टि के लिए तर्पण, पिंडदान, ब्राह्मण भोजन के साथ वृक्षारोपण करना चाहिए। वृक्ष सकारात्मक ऊर्जा देते हैं। इसलिए ग्रंथों में भी बताए गये वृक्ष पितृ पक्ष में लगाए तो पितरों का आशीर्वाद मिलता है। पीपल के वृक्ष में देवताओं के साथ ही पितरों का भी वास होता है। इसलिए श्राद्ध पक्ष में पीपल का वृक्ष खासतौर पर लगाएं। इसे लगाने से पर्यावरण साफ रखने में तो मदद होती है पितरों के साथ देवता भी प्रसन्न होते हैं। पित्र पक्ष की अमावस्या पर जरूरतमंदों को अनाज वस्त्र आदि का दान करना चाहिए। पितरों की शांति के लिए वस्त्र दान भी करते कर सकते हैं। धार्मिक स्थल, मंदिर में दान कर सकते हैं। गरीबों को भोजन करा सकते हैं। गौशाला में गायों को चारा डाल सकते हैं। सूर्यास्त के बाद घर में बने मंदिर में और तुलसी के पास दीपक जलाएं। अमावस्या तिथि पर चंद्रमा दिखाई नहीं देता है। इसलिए रात को अंधकार और नकारात्मकता बढ़ जाती है। दीपों की रोशनी से घर में सकारात्मक वातावरण बनता है। हिन्दुस्थान समाचार / रमेश/संदीप-hindusthansamachar.in