शहरी सरकार आधी आबादी को सौंपने महिला मतदाताओं को आना होगा आगे
शहरी सरकार आधी आबादी को सौंपने महिला मतदाताओं को आना होगा आगे
राजस्थान

शहरी सरकार आधी आबादी को सौंपने महिला मतदाताओं को आना होगा आगे

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जयपुर, 15 अक्टूबर (हि. स.)। गांवों की सरकार चुनने के लिए आधी आबादी ने अपना चूल्हा चौका छोडक़र मतदान केंद्रों पर मतदान करने के लिए पूरी जिम्मेदारी निभाई। लेकिन पुरुषों की तुलना में महिलाओं का मतदान प्रतिशत कम रहा। अब शहरी सरकार चुनने की तैयारी है। जयपुर नगर निगम हैरिटेज और ग्रेटर की मुखियां इस बार महिला होंगी। अब महिला मुखिया को शहरी सरकार की जिम्मेदारी सौंपने के लिए महिला मतदाताओं को भी आगे आना होगा। लोकसभा, विधानसभा, पंचायत चुनाव हो या फिर निकायों के चुनाव महिलाओं का मतदान प्रतिशत कम ही रहा हैं। राजधानी में पहली बार शहरी सरकार की मुखिया महिला होंगी। पहली बार दो निगमों की दोनों महापौर की सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। महिला मतदाताओं का मतदान प्रतिशत हर बार पुरुषों की तुलना में कम रहा है। पिछले तीन निकाय चुनाव में मतदान प्रतिशत को देखें तो यह आधा ही रहा है। 2014 में जहां 56.69 फीसदी महिलाओं ने मतदान किया, वहीं 2009 में 49.40 फीसदी और 2004 में महज 39.38 फीसदी आधी आबादी की भागीदारी शहरी सरकार बनाने में रही। इस बार दोनों निगमों में 21 लाख से अधिक कुल मतदाता है। इनमें से 10 लाख 24 हजार 868 महिला मतदाता है। चुनाव आयोग की ओर से महिला मतदाताओं को मतदान के प्रति जागरूक करने के लिए विधानसभा और लोकसभा चुनाव में पिंक बूथ बनाए गए, जिसमें पोलिंग पार्टी से लेकर पुलिसकर्मी महिलाओं तक को तैनात किया गया। बावजूद, इसके महिलाओं का वोट प्रतिशत नहीं बढ़ सका। इस बार जयपुर में विधानसभावार 250 वार्ड हैं, इनमें महिला मतदाताओं की संख्या काफी अधिक है। अभी ग्रेटर निगम क्षेत्र में विद्याधर नगर में 157663, झोटवाड़ा में 94727, सांगानेर में 148633, बगरू में 78041 तथा मालवीय नगर में 104593 महिला मतदाता है। जबकि, हेरिटेज निगम क्षेत्र में आमेर में 15633, हवामहल में 112986, सिविल लाइंस में 113934, किशनपोल में 90065 तथा आदर्श नगर विधानसभा क्षेत्र में 108593 महिला मतदाता है। निगम चुनावों में मतदाताओं में पुरुषों और महिलाओं के अंतर को खत्म करने के लिए महिला मतदाताओं को जागरूक करने पर जोर दिया जा रहा है। मतदान के लिए इन्हें विशेष रूप से प्रेरित करने पर फोकस किया जा रहा है। पिछले कुछ चुनाव में महिलाओं और पुरुषों के बीच मतदान में अंतर रहने के कारण जिला प्रशासन की सोच है कि इस बार अधिक से अधिक महिला मतदाताओं को मतदान केंद्र तक लाया जाए। हिन्दुस्थान समाचार/रोहित/संदीप-hindusthansamachar.in