व्यक्तित्व विकास व संस्कारों का एकमात्र साधन संस्कृत : हस्तीमल
व्यक्तित्व विकास व संस्कारों का एकमात्र साधन संस्कृत : हस्तीमल
राजस्थान

व्यक्तित्व विकास व संस्कारों का एकमात्र साधन संस्कृत : हस्तीमल

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जयपुर, 27 जुलाई (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य हस्तीमल ने कहा कि संस्कृत व्यक्तित्व विकास व संस्कारों का एकमात्र साधन है। इसके संरक्षण के लिए समाज में जागरूकता की आवश्यकता है। उन्होंने ये उदगार संस्कृत भारती द्वारा आयोजित संभाषण शिविर में व्यक्त किए। हस्तीमल ने कहा कि संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है। दुनिया में संस्कृत ही एक ऐसी भाषा है जो पूरी तरह सटीक व शुद्ध है। वैदिक भाषा होने के कारण इसमें वेद—पुराणों की रचना की गई थी। संस्कृत भाषा में वैदिक जप मानव मन, शरीर व आत्मा पर गहरा प्रभाव डालते हैं। उन्होंने संस्कृत को राष्ट्र निर्माण व विश्व गुरु का प्राण स्वरूप बताते सभी से संस्कृत के संरक्षण और संवर्धन में अपनी अहम भूमिका बनाने पर जोर दिया। संस्कृत भारती के सम्पर्क प्रमुख हिमांशु भट्ट ने बताया कि इस अवसर पर संस्कृत सप्ताह में संभाषण शिविर पत्रक का लोकार्पण भी हस्तीमल जी के द्वारा किया गया। उन्होंने बताया कि वरिष्ठ प्रचारक हस्तीमल हाल ही में भोपाल में कोरोना से युद्ध लड़कर कोरोना योद्धा के रूप में चिकित्सालय से स्वस्थ होकर भोपाल संघ कार्यालय लौटे हैं। कार्यक्रम में संस्कृत भारती के मंत्री देवेंद्र पंड्या, डॉ. यज्ञ आमेटा, नरेंद्र शर्मा, रेखा सिसोदिया, महेंद्र सिंह, संगीता, कुलदीप जोशी, डॉ. राजेश मलिक, डॉ. विष्णु सुवालका, नरेंद्र पोरवाल, रविंद्र शर्मा, रविंद्र सिंह, रुपावती समेत संस्कृत से जुड़े लोग शामिल हुए। हिन्दुस्थान समाचार/राघवेन्द्र/संदीप-hindusthansamachar.in