विश्वविद्यालय से महाविद्यालयों की सम्बद्धता प्रक्रिया होगी पारदर्शी
विश्वविद्यालय से महाविद्यालयों की सम्बद्धता प्रक्रिया होगी पारदर्शी
राजस्थान

विश्वविद्यालय से महाविद्यालयों की सम्बद्धता प्रक्रिया होगी पारदर्शी

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अजमेर, 17 अक्टूबर(हि.सं)। महाविद्यालयों की विश्वविद्यालयों से संबद्धता प्रक्रिया आनलाइन हो तथा निरीक्षण दल का पैनल गोपनीय रखा जाए तो ही संबद्धता से जुड़े मामले पारदर्शी हो सकते हैं। यह विचार महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय अजमेर के महाविद्यालयों की सम्बद्धता से जुड़े मामलों में पारदर्शिता लाने के संबंध में प्रोफेसर बी.एम. शर्मा (पूर्व अध्यक्ष, राजस्थान लोक सेवा आयोग) की अध्यक्षता में आयोजित पहली वर्चुअल बैठक में उभर कर सामने आए। प्रोो. शर्मा ने विश्वविद्यालय की एकेडमिक शाखा के अधिकारियों से सम्बद्धता प्रक्रिया में आने वाली कठिनाइयों के बारे में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि कितने सम्बद्ध महाविद्यालय हैं और कितने महाविद्यालयों की सम्बद्धता प्रक्रियाधीन है। प्रोफेसर शर्मा ने यह भी निर्देश दिया कि संबद्धता के क्रम में उपलब्ध अध्यादेश की एक-एक प्रति सभी सदस्यों को उपलब्ध करवायी जाये। समिति के सदस्यों ने विश्वविद्यालय के अध्यादेश 70-ए के बारे में विश्वविद्यालय द्वारा किए गए संशोधनों व प्रबंध मंडल में लिए गए निर्णयों आदि के बारे में भी जानकारी अर्जित की। इस दौरान यह सुझाव भी आए की महाविद्यालयों की सम्बद्धता की प्रक्रिया को आमदनी का जरिया नहीं बनाया जाना चाहिए तथा महाविद्यालयों पर लगने वाली शास्ति भी विवेकपूर्ण होनी चाहिए। सम्बद्धता प्रक्रिया को ऑनलाइन करने एवं निरीक्षकों के पैनल को गोपनीय रखे जाने की भी सिफारिस की गई। अध्यक्ष ने सदस्यों से आग्रह किया कि इस समिति द्वारा संबद्धता के विषय में की गई अनुशंसा पारदर्शिता व तकनीकी रूप से राज्य के अन्य राज्य पोषित विश्वविद्यालयों में एकरूपता के निमित्त मार्गदर्शक बननी चाहिए। प्रो. शर्मा ने सम्बद्धता प्रक्रिया के विकेंद्रीकरण करने पर भी विचार रखे। बैठक में समिति सदस्य प्रोफेसर अशोक नागावत, प्रोफेसर संजय लोढ़ा, प्रोफेसर शिवप्रसाद तथा डॉ. एस.आशा उपस्थित रहे । यहां गौरतलब है कि हाल ही में मदस विश्वविद्यालय के निर्वतमान कुलपति प्रो आरपी सिंह को अपने कथित निजी सहायक एवं चालक व गार्ड के जरिए महाविद्यालयों की संबद्धता के मामलों में घूस लेने के आरोप में ही निलंबित किया गया था। इस मामले में एक निजी कॉलेज का संचालक भी पकड़ा गया था। मदस विश्वविद्यालय से अजमेर, भीलवाड़ा, नागौर आदि नजदीकी संभाग स्तरीय क्षेत्रों के अनेक कॉलेज जुड़े हुए हैं। कई कालेजों की संबद्धता लंबित है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की अदालत में यह प्रकरण चल रहा है। हिन्दुस्थान समाचार/संतोष/संदीप-hindusthansamachar.in