लाॅकडाउन में रोजनामचा सुनील की उपलब्धि: जयपुर रेंज आईजी सेंगथिर
लाॅकडाउन में रोजनामचा सुनील की उपलब्धि: जयपुर रेंज आईजी सेंगथिर
राजस्थान

लाॅकडाउन में रोजनामचा सुनील की उपलब्धि: जयपुर रेंज आईजी सेंगथिर

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जयपुर, 22 नवम्बर(हि.स.)। पुलिस उप अधीक्षक सुनील प्रसाद शर्मा लिखित उपन्यास ‘‘लाॅकडाउन रोजनामचा‘‘ मौत मिले पर माटी में का विमोचन रविवार को प्रेस क्लब के मीडिया सेन्टर में हुआ। इस अवसर पर समारोह के मुख्य अतिथि जयपुर रेंज के आईजी एस. सेंगथिर ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान लगे लाॅकडाउन में पुलिस महकमें में व्यस्तता के बावजूद पुलिस उप अधीक्षक अधिकारी सुनील शर्मा ने अपने घरों की ओर लोगों के लौटने के संवेदनशील दृश्य को अपनी लेखनी से पुस्तक में समाहित कर सच्चाई को बखूबी उजागर किया है। उन्होनें कहा कि लाॅकडाउन में भी प्रतिदिन लेखन करना पुलिस उप अधीक्षक सुनील प्रसाद शर्मा की उपलब्धि है। इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार लोकेश कुमार सिंह साहिल, वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार ईशमधु तलवार, पुलिस अधीक्षक शंकर दत्त शर्मा और पिंकसिटी प्रेस क्लब के अध्यक्ष मुकेश मीणा ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में शहर के वरिष्ठ साहित्यकार,पत्रकार एवं संस्कृतिकर्मी मौजूद थे। लेखक और पुलिस उप अधीक्षक सुनील प्रसाद शर्मा ने बताया कि इस सदी की सबसे भयावह और विश्वव्यापी महामारी कोरोना के दौरान भारत में लाॅकडाउन की अवधि में प्रवासी मजदूरों की व्यथा कथा का विस्तृत वर्णन इसमें है। यह उपन्यास महज एक कथा कहानी तक सीमित न होकर उससे आगे लेखनीय स्वानुभूत से उपजा हदय विदारक तथ्यों का लेखा-जोखा भी है। लाॅकडाउन के दौरान प्रवासी मजदूरों की आह, कसक, करूण कंदन और दर्दनाक हादसे का मार्मिक और जीवंत चित्रण तलाश तो है ही, इस पुस्तक में साथ ही साथ इस त्रासदी के मूल कारणों में की तमाश करता एवं यक्ष पश्न भी समानान्तरण खड़ा दिखता है और समाधान की चेष्टा भी। कोरोना महामारी के दौरान पुलिस विभाग की नई मानवीय छवि को परिभाषित करती यह किताब वाकई में एक प्रमाणिक दस्तावेज की तरह प्रतीत होती है। उपन्यास के पानों से प्रशासनिक व्यवस्था एवं विसंगतियों पर सवाल उठाना भी बहुत प्रासंगिक जान पड़ता है। उपन्यास में कोरोना संक्रमण के दौरान समाज के कई नए तवकों के बारें में जानकारी, टूटते बिखरते पारिवारिक संबंधों की चटक,तो वहीं कुछ नए संबंधों का पदार्पण भी इस पुस्तक की विशेषता है। इस महामारी से निपटने में पुलिस,चिकित्सकों, स्वास्थ्य कर्मियों, सफाईकर्मियों की अतुलनीय भूमिका रही है और ये लोग सच्चे कारोना वारियर्स के रूप के बार में जानना बहुत ही सुखद, प्रासंगिक और मानवीय लगता है। उपन्यास के मुख्य पात्र द्वारा ‘‘कोरोना वारियर्स‘‘ के बारें में कुछ नए तथ्यों का प्रस्फुटन इस पुस्तक की बड़ी विशेषता है। पुलिस प्रशासन और सरकारी तंत्र की बारीक और सूक्ष्म व्याख्या हकीकत की धरातल पर योजनाओं के क्रियान्वयन की मीमांसा, प्रवासी मजदूरों द्वारा भोगे गए दुःख तकलीफों को दिल की गहराईयों से महसूस करने का साक्षी बनेगा यह उपन्यास। हिन्दुस्थान समाचार/दिनेश/ ईश्वर-hindusthansamachar.in