राज्य सरकार बताए कितनी और कैसे वसूल की जा सकती है स्कूल फीस-हाईकोर्ट
राज्य सरकार बताए कितनी और कैसे वसूल की जा सकती है स्कूल फीस-हाईकोर्ट
राजस्थान

राज्य सरकार बताए कितनी और कैसे वसूल की जा सकती है स्कूल फीस-हाईकोर्ट

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जयपुर, 14 अक्टूबर(हि.स.)। राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कहा है कि वह 19 अक्टूबर तक शपथ-पत्र पेश करके बताए कि कोरोना काल में प्राइवेट स्कूलों की फीस कितनी होनी चाहिए। इसके अलावा स्कूल खुलने के बाद फीस कितनी और कैसे वसूल की जा सकती है। मुख्य न्यायाधीश इंद्रजीत महान्ति और न्यायाधीश सतीश शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश राज्य सरकार और सुनील समदडिया की अपील पर सुनवाई करते हुए दिए। अदालत ने अगली सुनवाई 20 अक्टूबर को तय की है। सुनवाई के दौरान अपीलार्थी सुनील समदडिया की ओर से प्रपोजल पेश कर कहा कि स्कूल खुलने के तत्काल बाद अचानक से आर्थिक हालात ठीक नहीं होंगे। ऐसे में पूरे सत्र के लिए 50 प्रतिशत फीस निर्धारित की जानी चाहिए। इससे ना तो अभिभावकों पर दबाव आएगा और ना ही स्कूल संचालकों को परेशानी उठानी पडेगी। वहीं प्रोग्रेसिव स्कूल्स एसोसिएशन की ओर से प्रपोजल का विरोध किया गया। स्कूल संचालकों की ओर से कहा गया कि उन्होंने कोरोना संक्रमण के दौरान ऑनलाइन पढ़ाई करवाई है और स्टाफ को पूरा वेतन दिया है। ऐसे में उन्हें फीस वसूलने से नहीं रोका जाए। दूसरी ओर राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि उन्हें महामारी में इस फीस निर्धारण करने का अधिकार है। एकलपीठ ने भी राज्य सरकार की ओर से फीस स्थगित करने के आदेश को गलत नहीं बताया है। इसके अलावा राज्य सरकार ने एकलपीठ की ओर से 70 फीसदी ट्यूशन फीस वसूली को ही चुनौती दी है। इस पर खंडपीठ ने कहा कि स्कूल खुलने के बाद फीस वसूली को लेकर परेशानी आ सकती है। ऐसे में राज्य सरकार को स्कूल खुलने से पहले की फीस वसूली को लेकर मेकेनिज्म बना लेना चाहिए। इसके साथ ही अदालत ने इस संबंध में राज्य सरकार को शपथ पत्र पेश करने को कहा है। आगामी सुनवाई तक फीस वसूली पर रोक रहेगी। गौरतलब है की राज्य सरकार ने कोरोना संक्रमण के हालात देखते हुए दो अलग-अलग परिपत्र जारी कर स्कूल खुलने तक फीस स्थगित कर दी थी। इस आदेश को स्कूल एसोसिएशन की ओर से चुनौती दी गई। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने 7 सितम्बर को निजी स्कूलों को 70 फीसदी ट्यूशन फीस वसूलने की छूट दी थी। इस आदेश को राज्य सरकार और अभिभावकों ने खंडपीठ में चुनौती दी है। खंडपीठ ने गत एक अक्टूबर को एकलपीठ के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी। हालांकि खंडपीठ ने गत सुनवाई पर मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, लेकिन अपीलार्थी सुनील समदडिया और स्कूल संचालकों की ओर से प्रार्थना पत्र पेश कर कहा गया कि वीसी पर सुनवाई के दौरान तकनीकी बाधा आने के चलते वे अपना पक्ष नहीं रख पाए थे। ऐसे में खंडपीठ ने बुधवार को फिर से सुनवाई की थी। हिन्दुस्थान समाचार/पारीक/संदीप-hindusthansamachar.in