राजस्थान में साढ़े पांच महीने बाद पाबंदियों के बीच हुआ भक्तों का भगवान से मिलन
राजस्थान में साढ़े पांच महीने बाद पाबंदियों के बीच हुआ भक्तों का भगवान से मिलन
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राजस्थान में साढ़े पांच महीने बाद पाबंदियों के बीच हुआ भक्तों का भगवान से मिलन

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अपडेट....जयपुर, 07 सितम्बर (हि. स.)। कोरोना संक्रमण के बीच लगभग साढ़े पांच महीने बाद प्रदेशभर में राज्य सरकार ने भले ही धार्मिक स्थलों को खोलने की इजाजत दी हो, लेकिन बढ़ते संक्रमण के बीच राजधानी जयपुर सहित प्रदेशभर के चुनिंदा धार्मिक स्थलों के पट ही खुल पाए। जो धार्मिक स्थल खुले, उनमें भी दो गज की दूरी, मास्क, सैनेटाइजेशन और थर्मल स्क्रीनिंग के बाद भक्तों को प्रवेश मिला। सभी जगहों पर एक बार में सीमित लोगों को ही प्रवेश दिया गया। मंदिरों में फूल व प्रसाद आदि चढ़ाने पर भी पाबंदी रही। बड़े मंदिर प्रबंधनों ने फिलहाल इस माह मंदिर खोलने को लेकर एहतिहातन असमर्थता जाहिर की है। जौहरी बाजार स्थित जामा मस्जिद, संसारचंद्र रोड स्थित दरगाह मीर कुर्बान अली और चारदरवाजा स्थित मौलाना जियाउद्दीन साहब की दरगाह, राजापार्क, हीदा की मोरी गुरुद्वारा, अक्षयपात्र मंदिर, खोले के हनुमानजी, देवस्थान विभाग के मंदिर, आदर्शनगर स्थित राम मंदिर, परकोटा गणेश और कैथोलिक चर्च खुल गए। जबकि, गोविंद देवजी मंदिर, घाट के बालाजी, गोपीनाथजी मंदिर, एमआई रोड स्थित अमरापुर दरबार, धौलाई स्थित इस्कॉन मंदिर, स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर, न्यूसांगानेर रोड स्थित चिंताहरण काले हनुमान जी मंदिर के महंत मनोहरदास ने भक्तों से आनलाइन दर्शन की अपील की है। इसके अलावा ताडक़ेश्वर महादेव, झाडख़ंड महादेव मंदिर, चांदपोल स्थित रामचंद्र जी मंदिर, शिला माता मंदिर,चांदी की टकसाल स्थित काले हनुमान जी मंदिर 30 सितंबर तक बंद रहेंगे। गलता तीर्थ, अतिशय क्षेत्र महावीर जी और बाड़ा पदमपुरा जैन मंदिर 30 सितंबर तक बंद रहेंगे। शहर के ज्यादातर छोटे 220 से ज्यादा जैन मंदिर बंद रहेंगे। 18 सितंबर तक मोतीडूंगरी गणेश जी मंदिर, 17 सितंबर तक नहर के गणेश जी मंदिर व गढ़ गणेश मंदिर, 20 सितंबर तक गोनेर स्थित लक्ष्मी जगदीश मंदिर बंद रहेगा। अजमेर दरगाह मे आने-जाने के लिए सोमवार से चारों गेट खोल दिए गए। लॉकडाउन के बाद से सिर्फ मुख्य गेट से आवाजाही हो रही थी। दरगाह में वजू पर फिलहाल रोक रहेगी। पुष्कर के विख्यात ब्रह्मा मंदिर, रामदेवरा के बाबा रामदेव मंदिर और उदयपुर केे जगदीश मंंदिर में भी कम ही श्रद्धालुओं को दर्शन की अनुमति दी गई। हिन्दुस्थान समाचार/रोहित/संदीप-hindusthansamachar.in