नहीं सुनी तो 21 जुलाई से सडक़ों पर उतरेगा किसान
नहीं सुनी तो 21 जुलाई से सडक़ों पर उतरेगा किसान
राजस्थान

नहीं सुनी तो 21 जुलाई से सडक़ों पर उतरेगा किसान

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उदयपुर, 17 जुलाई (हि.स.)। किसानों की पीड़ा को नहीं समझने और पूर्व में किए गए वादों को भी पूरा नहीं करने से राज्य का किसान परेशान और आक्रोशित है। यदि सरकार ने समय रहते किसान की पीड़ा पर ध्यान नहीं दिया तो 21 जुलाई से किसान सडक़ों पर उतरेगा। फिर भले ही कोरोना एडवाइजरी का मामला हो, जिम्मेदार सरकार ही होगी। किसान संघ के संभागीय अध्यक्ष रणछोड़ पाटीदार ने कहा कि प्रदेश में गत खरीफ सीजन से ही फसल कटाई के समय ओलावृष्टि, टिड्डी हमलों व रबी सीजन में ओलावृष्टि, पाला गिरने व टिड्डी हमलों से किसानों की फसलों खराब होने से बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा था। अव्यवस्था व राज्य सरकार की लापरवाही के कारण खरीफ सीजन 2019 में समर्थन मूल्य पर मूंग की मात्र 10 प्रतिशत व मूंगफली की 15 प्रतिशत खरीद हो पाई थी, इसी दौरान ब्याज मुक्त सहकारी ऋण में सरकार ने 50 प्रतिशत से अधिक कटौती कर ओवर ड्यूज, नोशनल शेयर धारकों के ऋण पर रोक कर विभिन्न शर्ते लगाकर ऋण बंद कर दिया जिससे किसान साहूकारों से ऊंची ब्याज पर ऋण लेने को मजबूर हुए। किसान विरोधी निर्णयों की इसी कड़ी में विद्युत बिलों में दिया जाने वाला 833 रुपये का अनुदान बंद कर दिया गया जिससे प्रदेश के 14 लाख किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक भार बढ़ गया। इन सभी के कारण आर्थिक संकट से जूझ रहे किसान सहकारी ऋण विसंगतियों को दूर करने, फसल खऱाबे का मुआवजा देने, विधुत बिलों में अनुदान पुन: शुरू करके बिलों की पैनल्टी खत्म करने की मांग को लेकर किसान संघ के नेतृत्व में विभिन्न माध्यमों से ज्ञापन सौंप कर सरकार को लगातार अवगत करवाते रहे। सरकार की इस असंवेदनशीलता से किसानों में आक्रोश है। ऐसे में भारतीय किसान संघ ने 21 जुलाई को प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर धरना- प्रदर्शन से प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू करने निर्णय किया है। हिन्दुस्थान समाचार/सुनीता कौशल / ईश्वर-hindusthansamachar.in