नवरात्र स्थापना के साथ मातामह श्राद्ध 17 को
नवरात्र स्थापना के साथ मातामह श्राद्ध 17 को
राजस्थान

नवरात्र स्थापना के साथ मातामह श्राद्ध 17 को

news

जयपुर, 16 अक्टूबर (हि. स.)। प्रदेश में इस बार श्राद्ध पक्ष के बाद आश्विन अधिकमास शुरु होने के कारण मातामह श्राद्ध यानी नानी-नाना का श्राद्ध नहीं निकाला जा सका। शास्त्रीय परंपराओं के अनुसार हर साल पहले नवरात्रि को यह श्राद्ध निकाला जाता है, लेकिन अब पुरुषोत्तम मास समाप्त होने पर निज आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को यह श्राद्ध शनिवार को निकाला जाएगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार मातामह एक ऐसा श्राद्ध है, जो एक पुत्री अपने पिता और एक नाती अपने नाना को तर्पण के रूप में करता है। इस श्राद्ध को सुख शांति का प्रतीक माना गया है। कई धर्मग्रंथ महिलाओं को श्राद्ध का अधिकार देते हैं, यह इस बार शनिवार को है। इस दिन परिजनों की स्मृति में तर्पण और श्राद्ध कर्म की तिथि अनुसार करने की परंपरा है लेकिन कई बार तिथि पता नहीं होने या दिवंगत के परिवार में संतान ना होने सहित कई समस्याएं होती हैं तो इस स्थिति में मातामह श्राद्ध के दिन नाती तर्पण कर सकता है। माना जाता है कि मातामह का श्राद्ध सुख-शांति और संपन्नता की निशानी है। एक व्यक्ति अपने जीवनकाल में अपने बेटी के घर का पानी भी नहीं पीता और इसे वर्जित माना गया है, लेकिन उसके मरने के बाद उसका तर्पण उसका दौहित्र करता है। यह श्राद्ध करने के लिए कुछ नियम भी हैं। इसलिए यह श्राद्ध पंडितों की मेजबानी में ही किया जा सकता है। हिन्दुस्थान समाचार/रोहित/संदप-hindusthansamachar.in