थर्मल पावर प्लांट में पेनल्टी से साबित हुआ भ्रष्टाचार
थर्मल पावर प्लांट में पेनल्टी से साबित हुआ भ्रष्टाचार
राजस्थान

थर्मल पावर प्लांट में पेनल्टी से साबित हुआ भ्रष्टाचार

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जयपुर, 07 सितम्बर(हि.स.)। छबड़ा विधायक व पूर्व मंत्री प्रताप सिंह सिंघवी ने प्रदेश के कोयला आधारित बिजली उत्पादक थर्मल पॉवर प्लांट्स में फ्लाई ऐश का शत प्रतिशत उपयोग नहीं होने पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की ओर से पेनल्टी लगाने की सराहना की है। उन्होंने कहा कि ट्रिब्यूनल ने जुर्माना लगाकर यह प्रमाणित कर दिया है कि प्लांट्स में फ्लाई ऐश के नाम पर खुलेआम भ्रष्टाचार हो रहा है। गौरतलब है कि ट्रिब्यूनल ने छबड़ा सुपर क्रिटिकल थर्मल पॉवर प्लांट पर 370 लाख, कोटा थर्मल पॉवर प्लांट पर 84 लाख व छबड़ा थर्मल पॉवर प्लांट पर 80 लाख रुपये की पेन्ल्टी लगाई है। सिंघवी ने कहा कि केंद्र सरकार के वन व पर्यावरण मंत्रालय की ओर से 25 जनवरी 2016 को जारी गजट नोटिफिकेशन के अनुसार कोयला आधारित बिजली उत्पादक थर्मल पॉवर प्लांट 80 प्रतिशत फ्लाई ऐश का बेचान कर सकते हैं। बाकी 20 प्रतिशत की स्थानीय लघु उद्योगों व राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण के लिए निशुल्क आपूर्ति अनिवार्य है, लेकिन पॉवर प्लांट्स का स्थानीय प्रबंधन मिलिभगत से इनके हिस्से की फ्लाई ऐश को सीमेंट कंपनियों व बड़े उद्योगपतियों को बेच देता है। विधायक ने कहा कि फ्लाई ऐश नहीं मिलने की वजह से स्थानीय लघु व कुटीर उद्योग बर्बादी के कगार पर पहुंच गए हैं। उनके लिए परिवार का भरणपोषण करना बहुत मुश्किल हो रहा है। एक तरफ राज्य सरकार कह रही है कि राजस्थान में कोई भूखा नहीं सोएगा दूसरी तरफ पॉवर प्लांट्स का स्थानीय प्रबंधन की मनमानी की वजह से लघु व कुटीर उद्योग चोपट हो रहे हैं। सिंघवी ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और ऊर्जा मंत्री बीडी कल्ला को पत्र लिखकर इस पूरे मामले की जांच एंटी करप्शन ब्यूरो से करवाने की मांग की है। हिंदुस्थान समाचार/संदीप/ ईश्वर-hindusthansamachar.in