जीवन रक्षक उपकरणों सहित स्वास्थ्य मानक सुदृढ़ीकरण के लिए जिला खनिज फाउंडेशन निधि से 605 करोड़ रुपये का प्रावधान
जीवन रक्षक उपकरणों सहित स्वास्थ्य मानक सुदृढ़ीकरण के लिए जिला खनिज फाउंडेशन निधि से 605 करोड़ रुपये का प्रावधान
राजस्थान

जीवन रक्षक उपकरणों सहित स्वास्थ्य मानक सुदृढ़ीकरण के लिए जिला खनिज फाउंडेशन निधि से 605 करोड़ रुपये का प्रावधान

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जयपुर, 28 सितम्बर(हि.स.)। खान एवं पेट्रोलियम मंत्री प्रमोद जैन भाया ने बताया है कि जिला खनिज फाउण्डेशन निधि (डीएमएफटी) से कोरोना से बचाव के लिए जिलों में जीवन रक्षक उपकरणों, टेस्टिंग उपकरण, पीपीई किट, हाॅस्पिटल बेड, वेंटिलेटर आदि के लिए 605 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि जिलों में जिला खनिज फाउण्डेशन निधि में उपलब्ध कुल राशि में से 30 प्रतिशत राशि कोरोना बचाव कार्यों के लिए व्यय जा सकेगी। खान मंत्री प्रमोद जैन भाया ने बताया कि डीएमएफटी फण्ड में उपलब्ध राशि विकास कार्यों के लिए उपलब्ध कराई जाती है। कोरोना महामारी को देखते हुए जिस जिले में जितनी राशि उपलब्ध है उसमें से 30 प्रतिशत राशि कोविड बचाव कार्यों व चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार और सुविधाओं के लिए उपयोग में लाने के लिए जिला कलक्टरों को अधिकृत किया गया है। उन्होंने बताया कि जिला कलक्टर प्रभारी मंत्री की अध्यक्षता में आयोजित डीएमएफटी की जिला स्तरीय गवर्निंग काउंसिल की मीटिंग बुलाकर उपलब्ध राशि के अनुसार जिले की मांग व आवश्यकता को देखते हुए राशि स्वीकृत कर उपयोग में ले सकेंगे। अतिरिक्त मुख्य सचिव खान व पेट्रोलियम डाॅ. सुबोध अग्रवाल ने बताया कि राज्य के विभिन्न जिलों में डीएमएफटी कोष में 2018 करोड़ 59 लाख रुपये उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि कोरोना महामारी को देखते हुए इस कोष से 30 प्रतिशत राशि 605 करोड़ 58 लाख रुपए कोरोना महामारी से बचाव कार्यों के लिए व्यय किए जाने के विशेष प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने बताया कि जिलों में उपलब्ध कोष के आधार पर जिला वार राशि तय की गई हैं। जिले में उपलब्ध राशि उसी जिले में उपयोग में ली जा सकती है, इसी को ध्यान में रखते हुए जिलावार लक्ष्य तय किए गए हैं। एसीएस डाॅ. अग्रवाल ने बताया कि जिला कलेक्टरों को निर्देशित किया गया है कि वे उपलब्ध राशि के अनुसार आवश्यकताओं का आंकलन करवाएं और जल्दी से जल्दी जिला स्तरीय गवर्निंग काउंसिल की बैठक बुलाकर प्रस्ताव पारित करवाएं। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी से बचाव के लिए जिलों की चिकित्सा सेवाओं के लिए आवश्यक उपकरण व स्वास्थ मानकों के सुदृढीकरण आदि आदि कार्यों में इस राशि का उपयोग किया जा सकेगा। डाॅ. अग्रवाल ने बताया कि कोरोना महामारी के चलते आवश्यकता को देखते हुए जिला कलक्टरों को प्रोएक्टिव रोल निभाना होगा। इस राशि को जिला स्तर पर आवश्यक चिकित्सकीय संसाधन विकसित कर लोगों को बड़ी राहत दी जा सकेगी। हिन्दुस्थान समाचार/संदीप/ ईश्वर-hindusthansamachar.in