जटिल ओपन हार्ट सर्जरी कर बचाई दो मासूम जिंदगी

जटिल ओपन हार्ट सर्जरी कर बचाई दो मासूम जिंदगी
जटिल ओपन हार्ट सर्जरी कर बचाई दो मासूम जिंदगी

कोटा, 25 जुलाई (हि.स.)। धरती के भगवान कहे जाने वाले डॉक्टर ने दो मासूम बच्चों की ओपन हार्ट सर्जरी कर उन्हें नया जीवनदान दिया है। भारत विकास परिषद चिकित्सालय एवं अनुसंधान केन्द्र के कार्डियक सर्जरी विभाग में दो बच्चों की जटिल एवं दुर्लभ हार्ट सर्जरी की है। हॉस्पिटल के कार्डियक सर्जन डॉक्टर सौरभ शर्मा ने बताया कि दो बच्चों की अलग-अलग सर्जरी में एक बच्चे के चार तरह के प्रोसीजर और दूसरे बच्चे के दिल एकसाथ पांच जटिल बीमारी थी, जिसका भी सफलता पूर्वक ऑपरेशन किया गया। उन्होंने बताया कि इतनी कम उम्र के बच्चों के चार से पांच प्रोसीजर एकसाथ करना बड़ा ही जटिल व जोखिम भरा था। अगर जरा भी चूक हो जाती तो बच्चों की जान का जोखिम बन सकता था। उन्होंने बताया कि पहले बच्चे को ट्रेट्रोलॉजी ऑफ फेलोट विद पीडीए, विद एबसेंट पल्मोनरी वॉल्व बीमारी थी, यह बीमारी अतिदुर्लभ है। जो कि 100 फेलोट के मरीजों में से सिर्फ तीन बच्चों में पाई जाती है। पत्रकारों से बातचीत करते हुए कार्डियक सर्जन डॉ सौरभ शर्मा ने बताया कि चित्तौड़गढ़ से आए दस माह के बालक को ट्रेट्रोलॉजी ऑफ फेलोट जन्मजात बीमारी थी, जिसके कारण बच्चा काफी कमजोर और वजन भी मात्र सात किलो ही था। ऐसी बीमारी में बच्चा बार-बार बीमार पड़ने, वजन नहीं बढ़ने, ग्रोथ नहीं होने एवं शरीर के नीला पड़ने की बीमारी से ग्रसित रहता था। प्राथमिक जांच में बच्चे के टॉफ में पीडीए था, जिसमें जन्म के 72 घंटे पश्चात महाधमनी स्वतः बंद होनी थी वह बंद नहीं हुई। इसके साथ ही फेफड़े की महाधमनी का वॉल्व नहीं बना था। इस वजह से महाफेफड़े की महाधमनी व उससे निकलने वाली शाखाएं मोटी हो गई थी। इन सबके प्रोसीजर में हार्ट में बड़े छेद को बंद किया, फिर फेफड़े की तरफ जाने वाले सिकुड़े रास्ते को खोला और उसके बाद ह्रदय से जन्म से वॉल्व ही नहीं था, उसके लिए ह्रदय के उपर से झिल्ली लेकर वॉल्व बनाया। इस पूरे ऑपरेशन में करीब चार घंटे का समय लगा। अब बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है और शनिवार को ही उसे छुट्टी दे दी गई। दूसरे बच्चे के एकसाथ 5 बीमारियां, दिल में थे दो छेद दूसरे केस में बारां जिले के ढाई साल के बच्चे के पांच प्रोसीजर एकसाथ किए। बच्चे को टेट्रोलॉजी ऑफ फेलोट के साथ एएसडी था, उसकी फेफड़ों की महाधमनी बहुत ज्यादा सिकुड़ी हुई थी, जिसकी वजह से वो बार-बार ज्यादा नीला होकर बेहोश हो रहा था, व उसके फेफड़ों की महाधमनियां बहुत ही छोटे आकार की थी। और ये बच्चा बहुत ही ज्यादा सीरियस था। वार्ड में एक बार बेहोश होने पर उसे वेंटीलेटर पर लेना पड़ा। एक दिन वेंटीलेटर पर रखने के बाद उसे वेंटीलेटर से हटाकर फिर उसका ऑपरेशन किया गया। जितनी देरी उतना हार्ट व शरीर को नुकसान कार्डियक सर्जन डॉ सौरभ शर्मा ने बताया कि इन जन्मजात बीमारियों के इलाज में जितनी देरी की जाती है, उतना ही नुकसान हार्ट, लंग्स व पूरे शरीर को होता रहता है। हार्ट, लंग्स खराब होने लगता है और ग्रोथ भी नहीं होती है। आजकल तो जल्दी ही सर्जरी करने का ट्रेंड आ गया है। पहले ऐसा टेंड था कि वजह दस किलो या पन्द्रह किलो वजन होगा तो सर्जरी होगी। अब तो हम लोग तीन किलो से लेकर आगे तक सभी के ऑपरेशन करते हैं। केन्द्र की सरकारी योजना में नि:शुल्क हुआ ऑपरेशन भारत विकास परिषद हॉस्पीटल के संरक्षक श्याम शर्मा, अध्यक्ष राजकुमार गुप्ता, सचिव श्याम सुंदर गोयल, कोषाध्यक्ष सीताराम गोयल ने बताया कि इस ऑपरेशन की सबसे अहम बात यह थी कि मरीज केन्द्र सरकार की योजना के लाभार्थी थे, ऐसे में उन्हें कोई पैसा नहीं देना था, जबकि इन ऑपरेशन के लिए उन्हें करीब 5 लाख रूपये खर्च करने पड़ते। करीब चार घंटे तक डॉक्टरों की टीम ने पूरी मेहनत की और सभी प्रोसीजर सफल कर दिए। अभी मरीज पूरी तरह सामान्य हैं। उन्होंने कहा कि भारत विकास परिषद चिकित्सालय हार्ट सर्जरी के क्षेत्र में निरंतर कीर्तिमान स्थापित कर रहा है, जो कि पूरे हाड़ौती संभाग के लिए गौरव की बात है। हिन्दुस्थान समाचार/ईश्वर-hindusthansamachar.in

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