क्रांतिकारी बारहठ की 148वीं जयंती मनाई
क्रांतिकारी बारहठ की 148वीं जयंती मनाई
राजस्थान

क्रांतिकारी बारहठ की 148वीं जयंती मनाई

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जोधपुर, 21 नवम्बर (हि.स.)। क्रांतिकारी केसरीसिंह बारहठ की 148वी जयंती शनिवार को श्रद्धापूर्वक मनाई। इस दौरान नागौरी गेट स्थित चारण छात्रावास सहित अनेक स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। नागौरी गेट स्थित चारण छात्रावास में छात्रों ने वहां स्थापित क्रांतिकारी केसरीसिंह बारहठ की प्रतिमा का जलाभिषेक किया। उसके बाद उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की। इसके साथ ही उनके आदर्शों पर चलने की शपथ ली। कोरोना को देखते सूक्ष्म स्तर पर यह जयंती मनाई गई। इसी तरह कुछ अन्य स्थानों पर उनकी जयंती पर कार्यक्रम हुए। बता दे कि केसरी सिंह बारहठ का जन्म 21 नवम्बर 1872 को राजस्थान के शाहपुरा रियासत के देवपुरा नामक गांव में हुआ। वे राजस्थानी कवि और स्वतंत्रता सेनानी थे। केसरी सिंह बारहठ का देश के शीर्ष क्रांतिकारियों रासबिहारी बोस, मास्टर अमीरचन्द, लाला हरदयाल, श्यामजी कृष्ण वर्मा, अर्जुनलाल सेठी, राव गोपाल सिंह, खरवा आदि के साथ घनिष्ठ सम्बन्ध था। सन् 1912 में राजपूताना में ब्रिटिश सीआईडी द्वारा जिन व्यक्तियों की निगरानी रखी जानी थी उनमें केसरी सिंह का नाम राष्ट्रीय-अभिलेखागार की सूची में सबसे ऊपर था। केसरी सिंह को शाहपुरा में ब्रिटिश सरकार द्वारा दिल्ली-लाहौर षड्यन्त्र केस में राजद्रोह, षडय़न्त्र व कत्ल आदि के जुर्म लगा कर 21 मार्च 1914 को गिरफ्तार किया गया। जिस दिन केसरी सिंह को गिरफ्तार किया गया उसी दिन से उन्होंने अन्न-त्याग दिया। उन्हें भय था कि गुप्त बातें उगलवाने के लिए पुलिस कोई ऐसी चीज न खिला दे जिससे उनका मस्तिष्क विकृत हो जाय। इस प्रण को उन्होंने पांच वर्ष तक जेल-जीवन में निभाया। देश की स्वतंत्रता के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर कर देने वाले क्रान्तिकारी कवि केसरी सिंह बारहठ ने हरिओम तत् सत् के उच्चारण के साथ 14 अगस्त 1941 को देह त्याग दी। हिन्दुस्थान समाचार/सतीश / ईश्वर-hindusthansamachar.in