एक की फांसी की सजा रद्द, दो अभियुक्तों की फांसी आजीवन कारावास में बदली
एक की फांसी की सजा रद्द, दो अभियुक्तों की फांसी आजीवन कारावास में बदली
राजस्थान

एक की फांसी की सजा रद्द, दो अभियुक्तों की फांसी आजीवन कारावास में बदली

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जयपुर, 01 अगस्त (हि.स.)। राजस्थान हाईकोर्ट ने अलवर में पांच साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या करने के मामले में राजकुमार को मिली फांसी की सजा को रद्द करते हुए उसे तत्काल रिहा करने को कहा है। वहीं अदालत ने कोटा में पुराने नौकर के अपने साथी के साथ मिलकर विवाहिता की हत्या और उसकी नाबालिग बेटी के साथ दुष्कर्म कर हत्या करने के मामले में अभियुक्त मस्तराम और लोकेश मीणा को मिली फांसी की सजा को आजीवन कारवास में बदल दिया है। न्यायाधीश सबीना और न्यायाधीश सीके सोनगरा की खंडपीठ ने यह आदेश दोनों मामलों में राज्य सरकार की ओर से पेश डेथ रेफरेंस को अस्वीकार करते हुए अपीलार्थियों की अपील पर दिए। मामले के अनुसार 1 फरवरी 2015 को अलवर के बहरोड थाना इलाके में पांच साल की बच्ची के अपहरण को लेकर उसके परिजनों ने नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट पर पुलिस ने राजकुमार को गिरफ्तार किया। वहीं बाद में पुलिस को खंडहर से बच्ची की लाश मिली। जांच में उससे दुष्कर्म की बात भी सामने आई। मामले में अलवर पॉक्सो कोर्ट ने 11 जून 2019 को राजकुमार को अभियुक्त मानते हुए फांसी की सजा सुनाई। इसके खिलाफ राजकुमार की ओर से अपील और राज्य सरकार की ओर से डेथ रेफरेंस पेश किया गया। दूसरी ओर कोटा के भीमगंजमंडी थाना इलाके में 31 जनवरी 2019 की रात घर के पुराने नौकर मस्तराम ने अपने साथी लोकेश मीणा के साथ मिलकर विवाहिता की हत्या और उसकी नाबालिग बेटी के साथ दुष्कर्म करने के बाद उसकी हत्या कर दस लाख रुपए नकद और लाखों के जेवरात लूट लिए थे। मामले में गत 18 फरवरी को कोटा पॉक्सो कोर्ट ने दोनों अभियुक्तों को फांसी की सजा सुनाई। फांसी को कन्फर्म करने के लिए राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में डेथ रेंफरेंस और अभियुक्तों की ओर से आदेश को चुनौती देते हुए अपील पेश की गई थी। हिन्दुस्थान समाचार/ पारीक/ ईश्वर-hindusthansamachar.in