उपनेता प्रतिपक्ष राठौड़ ने मुख्यमंत्री गहलोत को लिखा पत्र
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राजस्थान

उपनेता प्रतिपक्ष राठौड़ ने मुख्यमंत्री गहलोत को लिखा पत्र

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जयपुर, 07 सितम्बर (हि.स.)। राजस्थान विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिखकर भारत सरकार द्वारा जारी कृषक उपज व्यापार और वाणिज्यक (सवंर्द्धन और सरलीकरण) अध्यादेश जिसके माध्यम से पूरे देश में किसान को अपनी फसल को कृषि मण्डी क्षेत्र या सरकार द्वारा अधिसूचित क्षेत्र में विक्रय के बंधन से मुक्त कर किसी भी स्थान, व्यक्ति, व्यापारी या संस्था को जब चाहे जहां चाहे जिस स्थान पर चाहे बेचने की दशकों पुरानी मांग को देशभर में लागू किया के बारे में सरकार की नीति व दृष्टिकोण को स्पष्ट किये जाने की मांग की है। राठौड़ ने कहा कि केन्द्र सरकार ने देश के किसानों को कृषक उपज व्यापार और वाणिज्यक (संवर्द्धन और सरलीकरण) अध्यादेश 2020 के माध्यम से कृषि क्रय विक्रय के व्यापार क्षेत्र को परिभाषित करते हुए भारत में प्रवृत्त राज्य कृषि उपज मण्डी अधिनियम के लागू होने के क्षेत्र को निर्बाधित यानि रोक दिया तथा यह वैधानिक अधिकार भी दे दिया था कि किसान अपनी फसल को देश में किसी भी व्यक्ति, व्यापारी, कंपनी को सीधे या इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म के माध्यम से बेच सकता है। इसमें किसी भी प्रकार के टेक्स या सैस को राज्य सरकार या केन्द्र सरकार द्वारा वसूल नहीं किये जाने का प्रावधान कर ऐतिहासिक निर्णय भी लिया है। राठौड़ ने कहा कि देश के किसानों को दशकों बाद अपनी फसल का निर्बाध रूप से कहीं भी बेचने के अधिकार के बारे में राज्य सरकार ने लगभग 3 माह पश्चात भी कोई नीतिगत निर्णय नहीं लिया है। इससे किसानों में असमंजसता है कि राज्य सरकार इसे लागू करना नहीं चाहती है। राठौड़ ने खेद जताते हुए कहा कि केन्द्र सरकार की मूल भावनाओं के विपरीत सरकार ने इसी 24 जुलाई को विधानसभा में प्रतिपक्ष की अनुपस्थिति में राजस्थान कृषि उपज मण्डी (संशोधन) विधेयक 2020 पारित करवाके यह सिद्ध कर दिया कि सरकार किसान को केन्द्र सरकार द्वारा बिना टेक्स, बिना फीस या सैस से अपनी फसल को देश में कहीं भी बेचान करने के वैधानिक अधिकार को लागू नहीं करना चाहती। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार जहां देश के किसानों को बिना किसी कर या फीस या सेस के अपनी उपज को अपनी मर्जी से जहां चाहे वहां किसी भी व्यापारी, संस्थान अथवा कम्पनी को बेचने के उन्मुक्त अधिकार दे रही हैं वहीं राज्य सरकार संघवाद कि भावना के विपरीत कानून बनाकर राज्य के किसानों से मनमाना मंडी टैक्स व कृषक कल्याण फीस वसूल करना चाह रही है। आज राजस्थान देश में सर्वाधिक मण्डी टेक्स 2.6 प्रतिशत राज्य के किसानों से वसूला जा रहा है, जो देश में सर्वाधिक है जिसे निसंदेह कृषि उपज मण्डी कानून में हाल ही में सरकार द्वारा किये गये संशोधन किसान कल्याण फीस के नाम पर और बढ़ाये जाने की प्रबंल संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। वहीं हमारे पडोसी राज्यों में जहां मण्डी टेक्स की दरे मात्र हरियाणा में 1, गुजरात में .5, मध्यप्रदेश में 1, महाराष्ट्र में .80 व कर्नाटक में .35 प्रतिशत है वहीं राजस्थान में सर्वाधिक 2.6 प्रतिशत है। राठौड़ ने प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मांग करते हुए कहा कि राज्य सरकार कृषि उपज पर सभी करों, फीस व सेस को तुरंत प्रभाव से वापिस ले ताकि राज्य का व्यापारी उन्मुक्त हो और किसानों की फसल का क्रय, विक्रय कर सके। उन्होंने सरकार से कृषक कल्याण कोष के नाम से जारी अतिरिक्त कृषक कल्याण फीस लिए जाने के प्रावधानों को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाएं। हिन्दुस्थान समाचार/ ईश्वर/संदीप-hindusthansamachar.in